कहते हैं जहां विज्ञान की सीमा खत्म होती है, वहां से आस्था का सफर शुरू होता है। हिमाचल प्रदेश के विश्वविख्यात शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी के दरबार से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है और मां के जयकारे लगा रहा है। बिलासपुर की एक महिला, जिसकी आंख की रोशनी पूरी तरह जा चुकी थी, डॉक्टरों के जवाब देने के बाद जब मां की शरण में पहुंची, तो हुआ एक अद्भुत चमत्कार।
बिलासपुर की रहने वाली दिलीपि देवी के चेहरे पर आज मुस्कान है, लेकिन कुछ समय पहले तक इनकी दुनिया में अंधेरा छाया हुआ था। दिलीपि देवी की एक आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई थी। परिवार ने हार नहीं मानी और कई बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे। बड़े-बड़े डॉक्टरों ने चेक किया, महंगी दवाइयां दीं, लेकिन न कोई दवा काम आई और न ही डॉक्टरों की पढ़ाई।
इलाज कराते-कराते जब दिलीपि देवी थक गईं तो उन्होंने ठीक होने की आस ही छोड़ दी थी, लेकिन फिर उन्हें याद आया ‘नयनों वाली माता’ का दरबार। अपनी आखिरी उम्मीद लेकर वो मां नयना देवी के चरणों में पहुंचीं। उन्होंने सच्चे मन से अरदास लगाई और मन्नत मांगी कि अगर उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई तो वो मां को चांदी के नेत्र अर्पित करेंगी। और फिर वो हुआ, जिसे विज्ञान चमत्कार कहता है।
मन्नत मांगकर घर लौटी दिलीपि देवी ने न कोई दवा खाई और न ही कोई झाड़-फूंक करवाई। धीरे-धीरे मां की कृपा बरसने लगी और उनकी आंखों की रोशनी वापस आने लगी। जो महिला देख नहीं सकती थी, आज वो सब कुछ साफ-साफ देख पा रही है। मन्नत पूरी होने के बाद दिलीपि देवी आज अपने पूरे परिवार के साथ माता रानी का शुकराना अदा करने दरबार पहुंचीं। उन्होंने विधि-विधान के साथ माता को चांदी के नेत्र चढ़ाए। मंदिर परिसर में जिसने भी इस साक्षात चमत्कार के बारे में सुना, उसने मां नयना देवी के जयकारे लगाने शुरू कर दिए।
कुछ लोगों के लिए ये बातें सुनी-सुनाई हो सकती हैं, लेकिन दिलीपि देवी ने इस चमत्कार को जिया है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर मन में सच्चा विश्वास हो तो मां अपने भक्तों की पुकार जरूर सुनती हैं और उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं।








