कहते हैं अगर इरादे नेक हों और हौसले बुलंद हों तो गरीबी और अभाव कभी भी सफलता के आड़े नहीं आते। इस कहावत को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के कोटली स्थित बग्गी तुंगल गांव के 26 वर्षीय जीवन लाल ने। एक दिहाड़ी-मजदूर और मिस्त्री के बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर ऐसा कारनामा किया है कि आज पूरा प्रदेश उन्हें सलाम कर रहा है। जीवन लाल ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (HPAS) की परीक्षा में 23वां स्थान हासिल कर तहसीलदार का पद प्राप्त किया है। खास बात यह है कि जीवन ने यह सफलता बिना किसी कोचिंग के और पुलिस की 24 घंटे की सख्त ड्यूटी के बीच पढ़ाई करके हासिल की है।
जीवन लाल की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने पिछले तीन सालों में तीन सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। वर्ष 2022 में वह बताैर कांस्टेबल पुलिस विभाग में भर्ती हुए। इसी साल अक्तूबर महीने में एलाइड सर्विस का एग्जाम पास कर किन्नौर के रिकांगपिओ में ऑडिट इंस्पैक्टर बने। वहीं अब प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर तहसीलदार के पद पर चयनित हुए हैं।
जीवन लाल एक अति साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता बीरी सिंह मिस्त्री का काम करते हैं और दिहाड़ी लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। जीवन ने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के स्कूल से और 12वीं कक्षा की पढ़ाई साईगलू स्कूल से की। इसके बाद उन्हाेंने ग्रैजुएशन मंडी कॉलेज से की। इसके बाद पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए वे धर्मशाला गए।
पुलिस की नौकरी में 24 घंटे की अनिश्चितता और थकान के बीच पढ़ाई करना आसान नहीं था। जीवन बताते हैं कि वह ड्यूटी के बीच में मिलने वाले ब्रेक में पढ़ते थे। कभी-कभी तीन-तीन घंटे की शिफ्ट के बीच समय निकालकर किताबों में सिर खपाते थे। औसतन वे दिन में 10 घंटे पढ़ाई करते थे। उन्होंने ठान लिया था कि बड़ी उड़ान भरनी है, इसलिए कभी भी संसाधनों के अभाव का रोना नहीं रोया।
जीवन की इस सफलता में उनके दोस्तों और विभाग का भी अहम योगदान रहा। धर्मशाला में उनके रूममेट रहे अंकुर बताते हैं कि जीवन बेहद मेहनती थे। पढ़ाई के दौरान उनके साथियों ने उनके लिए खाना बनाने तक की जिम्मेदारी संभाली ताकि जीवन का समय बच सके। वहीं, पुलिस विभाग के एक डीएसपी ने उन्हें गाइड किया और मोटिवेट किया।
जहां आज के दौर में युवा एक नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं जीवन लाल ने अपनी मेहनत से तीन-तीन नौकरियां हासिल कर यह साबित कर दिया है कि ‘मुकाम उसी को हासिल होता है, जिसने मुश्किलें देखी हों।’ जीवन लाल की यह उपलब्धि हिमाचल के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।








