कहते हैं ‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’… इस कहावत को सच कर दिखाया है सिरमौर की 25 वर्षीय बेटी शीतल कन्याल ने। आज हरिपुरधार के कांडो बड़ोल गांव में जश्न का माहौल है, मिठाइयां बंट रही हैं और हर किसी का मुंह मीठा कराया जा रहा है। वजह है शीतल की वह कामयाबी, जिसके लिए उन्होंने कई रातों की नींद कुर्बान की और असफलता के कड़वे घूंट भी पिए। शीतल ने हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) की परीक्षा में पूरे प्रदेश में 20वां रैंक हासिल कर अपने पिता का सपना साकार कर दिखाया है। उन्हें डिस्ट्रिक्ट कंट्रोलर के पद पर नियुक्ति मिली है।
शीतल के लिए यह सफर फूलों की सेज नहीं था। सिविल सर्वेंट की कुर्सी तक पहुंचने से पहले उन्हें तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा। वह मंजिल के करीब पहुंचतीं, लेकिन चूक जातीं। बार-बार गिरने के बावजूद शीतल ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पिता के सपने को अपनी जिद्द बना लिया और जी-जान से मेहनत जारी रखी। आखिरकार, उनके चौथे प्रयास में मेहनत रंग लाई और उन्होंने यह मुकाम हासिल कर लिया।
अक्सर लोग अधिकारी की सरकारी गाड़ी और ठाठ-बाट देखते हैं, लेकिन उसके पीछे का संघर्ष नहीं। शीतल अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। शीतल कहती हैं कि सिर पर अगर मां-बाप का हाथ हो और असफलता में भी उनका साथ और विश्वास हो तो सच में बच्चा हर जंग का मैदान फतेह कर जाता है।
बता दें कि शीतल के पिता ओम प्रकाश जेबीटी शिक्षक हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। शीतल परिवार की सबसे बड़ी संतान हैं। उनकी 3 छोटी बहनें और एक छोटा भाई है। शीतल के पिता ओम प्रकाश ने बेटी की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है।
शीतल की यह सफलता उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो असफलताओं से घबराकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। शीतल ने साबित कर दिया है कि अगर परिवार का साथ हो और इरादे पक्के हों तो बेटियां वह मुकाम पा सकती हैं जो किसी के लिए भी मिसाल बन जाए।








