अक्सर देखा जाता है कि खाकी वर्दी या बड़े ओहदे का रौब दिखाकर लोग नियमों की धज्जियां उड़ा देते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने वीआईपी कल्चर के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है। यहां तैनात ‘लेडी सिंघम’ क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) सोना चंदेल ने साबित कर दिया है कि कानून का डंडा सिर्फ आम जनता के लिए नहीं, बल्कि खुद अधिकारियों पर भी समान रूप से चलता है।
जानकारी के अनुसार बीते दिसम्बर माह की 20 तारीख काे आरटीओ सोना चंदेल कालाअंब क्षेत्र में रूटीन चैकिंग पर थीं। बैरियर पर तैनात स्टाफ की निजी गाड़ियों की जांच शुरू हुई। सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी एक कर्मचारी ने हिम्मत जुटाकर, दबी जुबान में आरटीओ मैडम से कह दिया कि मैडम, बाकी सब तो ठीक है, लेकिन आपके खुद के सरकारी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र एक्सपायर हो चुका है।
यह सुनते ही वहां सन्नाटा पसर गया। सबको लगा कि अब मैडम भड़क जाएंगी, लेकिन आरटीओ सोना चंदेल ने जो किया, उसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने न तो पद का धौंस दिखाया और न ही बात को टाला। उन्होंने तुरंत अपनी ही सरकारी गाड़ी का 500 रुपए का चालान काटने का आदेश दे दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मौके पर ही गाड़ी का नया प्रदूषण प्रमाण पत्र भी बनवाया।
आरटीओ सोना चंदेल की ईमानदारी का यह पहला किस्सा नहीं है। फ्लैशबैक में जाएं तो 27 मई, 2025 को भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया था। उस वक्त हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का अभियान चल रहा था। चैकिंग के दौरान आरटीओ के सामने उनके ही परिवार के एक सदस्य की स्कूटी आ गई, जिस पर नंबर प्लेट नहीं थी। रिश्तेदारी को दरकिनार करते हुए उन्होंने तुरंत 3000 रुपए का चालान थमा दिया। सूत्रों की मानें तो बाद में उन्होंने चालान की यह राशि अपनी जेब से भरी, लेकिन नियम तोड़ने पर अपने सगे-संबंधी को भी सरकारी छूट नहीं दी।
सिरमौर की इस महिला अधिकारी ने यह साफ कर दिया है कि पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियम-कायदे सबसे ऊपर हैं। जहां अधिकारी छोटी-छोटी गलतियों पर आम जनता की जेब ढीली करते हैं, वहां खुद गलती स्वीकार कर जुर्माना भरना एक ऐसी नजीर है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।








