कहते हैं कि दुनिया में मां से बड़ा योद्धा कोई नहीं होता और उसकी ममता के आगे तो साक्षात काल को भी झुकना पड़ता है। हरिपुरधार में हुए दर्दनाक बस हादसे के बीच से एक ऐसी ही भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया है। जिस भीषण दुर्घटना ने 14 लोगों की जान ले ली और कई परिवारों को उजाड़ दिया, उस मौत के मंजर में एक मां ने यमराज से लड़कर अपने 3 साल के बेटे ‘तेजस’ को सुरक्षित बचा लिया।जानकारी के अनुसार जिस वक्त
यह बस गहरी खाई में गिर रही थी, उस वक्त तेजस और उसकी मां ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर बैठे थे। जैसे ही बस अनियंत्रित होकर पलटने लगी और मां को खतरे का आभास हुआ, उन्होंने एक पल की भी देरी किए बिना तेजस को अपनी छाती से कसकर चिपका लिया। बस खाई में गिरती रही, झटके लगते रहे, लेकिन मां ने अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी। मां के शरीर पर गहरी चोटें आईं, उनका बुरा हाल हो गया, लेकिन उनकी बाहों के घेरे ने बेटे के लिए सुरक्षा कवच का काम किया। जब तक बस पूरी तरह रुक नहीं गई, मां ने बेटे को अपने आगोश से अलग नहीं किया।
हादसे के बाद का मंजर रूह कंपा देने वाला था। चारों तरफ चीख-पुकार मची थी, लोग तड़प रहे थे और शव बिखरे पड़े थे। रेस्क्यू टीम और स्थानीय लोग जब घायलों को निकाल रहे थे, तो उन्हें तेजस मिला। वहां मौजूद हर शख्स यह देखकर दंग रह गया कि जिस हादसे में बस के परखच्चे उड़ गए, उसमें 3 साल के इस मासूम को एक खरोंच तक नहीं आई थी।
लोग इसे ईश्वर का चमत्कार मान रहे हैं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह चमत्कार भगवान से पहले उस मां की वजह से हुआ, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना बेटे को बचाया। तेजस की मां गंभीर रूप से घायल हैं, लेकिन उनकी ममता जीत गई है। मुसीबत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, मां का आंचल दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान है। इस वीर मां और उसकी ममता को हमारा सलाम।








