कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो पहाड़ जैसी मुश्किलें भी राई के समान लगने लगती हैं। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के एक छोटे से गांव की बेटी ने इसे सच कर दिखाया है। सरकाघाट उपमंडल के गांव जबोठ की रहने वाली पूनम शर्मा ने तमाम अभावों और दुखों को पीछे छोड़ते हुए यूपीएससी की परीक्षा पास कर नर्सिंग ऑफिसर बनकर सफलता के झंडे गाड़े हैं। पूनम की इस कामयाबी ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे हिमाचल का मान बढ़ाया है।
जन्म से पहले ही पिता को खोया, 2021 में मां भी चल बसीं
पूनम की सफलता की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उनका अतीत उतना ही संघर्षपूर्ण रहा है. पूनम का जीवन जन्म से ही चुनौतियों से घिरा रहा. उनके जन्म लेने से पहले ही सिर से पिता का साया उठ चुका था। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उनकी माता पुष्पा देवी ने आंगनबाड़ी में सहायिका के रूप में काम किया, लेकिन दुखों का पहाड़ तब और टूट पड़ा, जब वर्ष 2021 में हृदय गति रुकने से मां का भी निधन हो गया।
चाचा-चाची बने माता-पिता, अपनी बेटी से बढ़कर दिया प्यार
माता-पिता के असमय निधन के बाद पूनम अकेली पड़ गई थीं, लेकिन ऐसे कठिन समय में उनके चाचा सुरेंद्र शर्मा और चाची सुनीता शर्मा ढाल बनकर खड़े हुए। उन्होंने पूनम की पढ़ाई और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने पूनम को कभी माता-पिता की कमी महसूस नहीं होने दी और सगी बेटी से बढ़कर प्यार और मार्गदर्शन दिया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
PGIMER चंडीगढ़ से की पढ़ाई, UPSC में हासिल किया 582वां रैंक
पूनम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय मिडिल स्कूल जबोठ से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पांवटा साहिब के सीनियर सैकेंडरी स्कूल से 12वीं पास की। स्वास्थ्य सेवा में जाने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने जोनल अस्पताल मंडी से जीएनएम की और फिर पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन से पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग की डिग्री हासिल की। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर पूनम ने यूपीएससी द्वारा आयोजित ईएसआईसी परीक्षा में ऑल इंडिया 582वां रैंक हासिल कर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर चयनित होकर मिसाल पेश की है।
फरीदाबाद मेडिकल कॉलेज में देंगी सेवाएं
पूनम शर्मा को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति मिली है। अपनी इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपने अभिभावकों को दिया है। भावुक होते हुए पूनम ने कहा कि यह उपलब्धि मेरे स्वर्गीय माता-पिता के आशीर्वाद और मेरे चाचा-चाची के त्याग, सहयोग और विश्वास का परिणाम है। उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया, जिससे मैं आज इस मुकाम पर पहुंच सकी हूं।
गांव में जश्न का माहौल
पूनम की इस उपलब्धि की खबर मिलते ही जबोठ, भांबला और पूरे सरकाघाट क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया और बेटी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूनम की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं।








