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हिमाचल: गहनों की दुकानों में वन्यजीवों के अंगाें के कारोबार का पर्दाफाश, तेंदुए के 85 नाखून और 5 दांत बरामद

शिमला जिला के राेहड़ू शहर में गहनों की चमक के पीछे चल रहे वन्यजीवों के अंगों के काले कारोबार का वन विभाग ने भंडाफोड़ किया है। मंगलवार को विभाग की एक विशेष टीम ने शहर के विभिन्न बाजारों में स्थित ज्वैलरी की दुकानों पर अचानक छापेमारी की। इस कार्रवाई ने बाजार में हड़कंप मचा दिया, जब जांच के दौरान 6 नामी ज्वैलर्स के पास से तेंदुए के 85 नाखून और 5 दांत बरामद किए गए। इसके साथ ही दुर्लभ पक्षियों के पंख भी जब्त किए गए हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि इन प्रतिबंधित अंगों का इस्तेमाल सोने-चांदी के ताबीज और लॉकेट में सजावट के लिए किया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, लोग अंधविश्वास और तांत्रिक मान्यताओं के चलते तेंदुए के नाखूनों और दांतों को धारण करना शुभ मानते हैं। इसी मांग का फायदा उठाकर ज्वैलर्स ऊंचे दामों पर इन अवैध अंगों को बेच रहे थे।

वन मंडल अधिकारी रोहड़ू, एन. रविशंकर ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बरामद सामग्री पूरी तरह से प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि तेंदुआ एक संरक्षित वन्यजीव है। इसके अंगों का व्यापार करना या उन्हें पास रखना गैर-जमानती अपराध है। संबंधित दुकानदारों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

वन विभाग अब इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि इन ज्वैलर्स को इन अंगों की सप्लाई कहां से हो रही थी। डीएफओ ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ शुरुआत है… आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा ताकि वन्यजीवों के अवैध शिकार पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

डीएफओ एन. रविशंकर ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे अवैध उत्पादों और अंधविश्वासों से दूर रहें। इस तरह के आभूषण खरीदना न केवल अनैतिक है, बल्कि आपको जेल की सलाखों के पीछे भी पहुँचा सकता है। विभाग ने लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने का आग्रह किया है।

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Author: Desk

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