हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में टांडा मेडिकल कॉलेज के समीप मिट्टी में दबा नवजात का शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना खोली पंचायत के सिंबल खोला वार्ड की है। स्थानीय निवासियों ने सैर के दौरान कुत्तों को सड़क किनारे मिट्टी खोदते हुए देखा। शंका होने पर जब लोगों ने वहां जांच की तो एक सफेद पोटली दबी हुई मिली। सूचना मिलने पर कांगड़ा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पोटली को बाहर निकाला, जिसमें से एक नवजात का शव बरामद हुआ।
प्राथमिक दृष्टि में संदिग्ध लग रहा यह मामला जांच के बाद एक परिवार की मजबूरी और बेबसी की कहानी निकला।
पुलिस की त्वरित जांच में चम्बा जिले की चुराह तहसील निवासी एक 22 वर्षीय युवक ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। युवक ने बताया कि वह टांडा अस्पताल में भर्ती अपनी बहन का तीमारदार है। उसकी बहन, जो 8 माह की गर्भवती थी, को जटिलताओं के चलते चम्बा मेडिकल कॉलेज से टांडा रेफर किया गया था। यहां उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, जिनमें से एक जीवित है और दूसरे का जन्म मृत हुआ था।
युवक ने पुलिस को अपनी विवशता बताते हुए कहा कि वह मजदूरी करता है और यहां अपनी बहन के साथ अकेला पुरुष सदस्य था। उसने बताया कि मृत बच्चे के शव को चम्बा (घर) नहीं ले जा सकता था और न ही वह गंभीर हालत में भर्ती बहन और जीवित बच्चे को छोड़कर जा सकता था।
परिस्थितियों से हारकर उसने रात के करीब 1 बजे 500 रुपए में एक टैक्सी किराए पर ली और चालक से फावड़ा मांगकर पास ही सुनसान जगह पर गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया, ताकि वह जल्द से जल्द अस्पताल लौटकर अपनी बहन की देखभाल कर सके।
कांगड़ा पुलिस ने युवक के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि युवक द्वारा दी गई जानकारी और अस्पताल के रिकॉर्ड में समानता है या नहीं। फिलहाल, यह मामला अपराध से अधिक परिस्थितियों की मार का प्रतीत हो रहा है।
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