कहते हैं डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं, जो मौत के मुंह से भी मरीज को खींच लाते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में नियति का एक ऐसा क्रूर खेल देखने को मिला, जहां दूसरों की जिंदगी बचाने वाली एक होनहार डॉक्टर खुद जिंदगी की जंग हार गई। 35 वर्षीय युवा डॉक्टर नम्रता अत्री के आकस्मिक निधन ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। दुखद पहलू यह है कि डॉ. नम्रता अपने पीछे 6 महीने की दुधमुंही बच्ची को छोड़ गई हैं, जिसे अब मां का आंचल कभी नसीब नहीं होगा।
पीलिया ने ली डॉक्टर की जान
जानकारी के अनुसार डॉ. नम्रता अत्री वर्तमान में एनएचएम माजरा में तैनात थीं। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले उन्हें पीलिया की शिकायत हुई थी। शुरूआती इलाज के लिए उन्हें नाहन के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें पंचकूला रैफर किया गया। इलाज के बाद वह ठीक हो गई थीं, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बीते दिनों अचानक उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और 18 फरवरी को उनका दुखद निधन हो गया।
घर में था डॉक्टरों का ज्ञान, फिर भी नहीं बची जान
यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि डॉ. नम्रता के पति डॉ. आशुतोष शर्मा भी एक जाने-माने चिकित्सक हैं। पति-पत्नी दोनों मेडिकल क्षेत्र के एक्सपर्ट थे, लेकिन जब आखिरी वक्त आया तो न दवा काम आई और न ही ज्ञान। एक मामूली मानी जाने वाली बीमारी जानलेवा साबित हुई।
कोरोना काल में की थी नि:स्वार्थ सेवा
डॉ. नम्रता और उनके पति डॉ. आशुतोष की जोड़ी ने कोरोना काल में मानवता की मिसाल पेश की थी। जब लोग अपनों से डर रहे थे, तब इस डॉक्टर दंपति ने बड़े अस्पतालों से मायूस होकर आए मरीजों का इलाज किया और कई जानें बचाईं। लेकिन अफसोस, जिस पुण्य ने दूसरों को बचाया, वह इस कठिन समय में उनके खुद के काम न आ सका।
मासूम बेटी को नहीं मिला मां का प्यार
डॉ. नम्रता हाल ही में मां बनी थीं। घर में नन्हीं परी (लक्ष्मी) के आने से खुशियों का माहौल था। बच्ची अभी महज 6 महीने की है और मां के दूध पर निर्भर थी। इससे पहले कि वह अपनी मां को पहचान पाती या ‘मां’ कहकर पुकार पाती, नियति ने उन्हें हमेशा के लिए जुदा कर दिया। डॉ. नम्रता के निधन से नाहन और चिकित्सा जगत में शोक की लहर है। हर कोई उस 6 महीने की बच्ची और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहा है।








