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हिमाचल में बच्चों की खरीद-फरोख्त के बड़े रैकेट का भंडाफोड़, पंजाब-हरियाणा से 7 महिलाओं समेत 9 गिरफ्तार

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पुलिस ने नशा माफिया नहीं, बल्कि ममता के सौदागरों पर बड़ी कार्रवाई की है। देहरा पुलिस ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करता था। पुलिस ने पंजाब और हरियाणा में छापेमारी कर 7 महिलाओं और 2 पुरुषों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक 60 वर्षीय महिला भी शामिल है।

IVF क्लीनिक और NGO की आड़ में चल रहा था धंधा

पुलिस जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था। आरोपियों के तार कुछ IVF क्लीनिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) से जुड़े बताए जा रहे हैं। यहाँ से उन्हें उन निसंतान दंपतियों की जानकारी मिलती थी जो बच्चे के लिए परेशान थे। वहीं, दूसरी तरफ ये उन मजबूर महिलाओं को तलाशते थे जो अपना बच्चा बेचने या सौंपने की स्थिति में हों। इसी डेटा के आधार पर ये शिकार और ग्राहक दोनों को साधते थे।

एक गलती और मुख्य सरगना गिरफ्तार

इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब 17 फरवरी 2026 को पुलिस थाना संसारपुर टैरेस में बच्चा गोद दिलाने के नाम पर करीब साढ़े 23 की ठगी की शिकायत दर्ज हुई। देहरा पुलिस के साइबर सैल ने टैक्निकल एनालिसिस किया, जिसके आधार पर मुख्य आरोपी दीपक आनंद को जालंधर से दबोचा गया। दीपक मूल रूप से हिमाचल का ही है, जो जालंधर में बैठकर ग्राहकों (दंपतियों) को गिरोह से जोड़ता था।

4 लाख 85 हजार में नवजात का सौदा

दीपक आनंद की निशानदेही पर पुलिस ने जालंधर, बठिंडा, मानसा और सिरसा (हरियाणा) में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने एक नवजात शिशु को सकुशल बरामद किया, जिसकी डील 4 लाख 85 हजार रुपये में तय हुई थी और पैसे भी ले लिए गए थे।

गिरोह की जड़ें गहरी, और भी चेहरे होंगे बेनकाब

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए सभी 9 आरोपियों (7 महिलाएं, 2 पुरुष) के काम बंटे हुए थे। गिरोह की जड़ें गहरी हैं और पुलिस अब उन क्लिनिकों और संस्थाओं की जांच कर रही है, जो इस अवैध कारोबार में इनकी मदद कर रहे थे। उम्मीद है कि जल्द ही इस नैटवर्क से जुड़े और भी चेहरे बेनकाब होंगे।

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Author: Desk

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