हमीरपुर: कहते हैं अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कोई न कोई सुराग पीछे छोड़ ही जाता है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में यह कहावत सच साबित हुई है। यहां एक 19 साल के युवक को एक मामूली बीड़ी के टोटे ने जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
मामला भोरंज उपमंडल के सम्मू गांव का है। यह वही गांव है जहां दिवाली नहीं मनाई जाती है। यहां 27 अक्टूबर 2024 को कमलेश कुमार के घर में भयानक आग लग गई थी। उस वक्त घर पर कोई नहीं था, कमलेश और उनकी पत्नी ड्यूटी पर गए हुए थे। आग इतनी भीषण थी कि घर का सारा सामान जलकर खाक हो गया। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आग कैसे लगी।
हमीरपुर पुलिस जब जांच करने पहुंची तो उन्हें जले हुए मलबे के बीच वह बीड़ी मिली। चूंकि घर के मालिक बीड़ी नहीं पीते थे, इसलिए पुलिस का शक गहरा गया। पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाली तो स्पर्श वहां संदिग्ध हालत में दिखा। पुख्ता सबूत के लिए पुलिस ने आरोपी स्पर्श का ब्लड सैंपल लिया। बीड़ी के टोटे पर लगे स्लाइवा का सैंपल लिया। फिर दोनों को जांच के लिए आरएफएसएल मंडी भेजा। फॉरेंसिक रिपोर्ट में आरोपी के ब्लड का डीएनए और बीड़ी पर मिले डीएनए पूरी तरह मैच कर गए। इस वैज्ञानिक सबूत के आधार पर हमीरपुर पुलिस ने 4 महीने बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी की पहचान स्पर्श पटियाल (19) निवासी बुमाणा के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि स्पर्श चोरी-छिपे घर में घुसा और आग लगा दी। आग लगाने के बाद वह इत्मीनान से घर के अंदर बैठा और बीड़ी जलाई। उसने आधी बीड़ी पी और बाकी वहीं फेंककर फरार हो गया। हैरानी की बात यह रही कि आग में पूरा घर जल गया, लेकिन वह बीड़ी का टोटा सबूत के तौर पर बच गया। पुलिस की इस सूझबूझ और वैज्ञानिक जांच की हर तरफ तारीफ हो रही है। फिलहाल पुलिस आग लगाने के कारणों का पता लगाने में जुट गई है।







