कहते हैं वक्त और किस्मत का भरोसा नहीं, कब क्या मोड़ ले ले। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर आंख को नम कर दिया है। पुलिस की वर्दी पहनकर देश सेवा और परिवार का सहारा बनने का सपना देखने वाली 28 वर्षीय महिला कांस्टेबल नेहा शर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहीं। लेकिन नियति का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस दिन नेहा को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही थी, ठीक उसी दिन उनके बैंक खाते में उनकी नौकरी की पहली सैलरी क्रेडिट हुई। इस संयोग ने वहां मौजूद हर शख्स को झकझोर कर रख दिया।
सिरमौर जिले के नाहन क्षेत्र के गांव मनोण (भाणत) के कमल दत्त शर्मा और नीशा शर्मा की बेटी नेहा ने हाल ही में खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा किया था। कड़ी मेहनत के बाद उनका चयन हिमाचल पुलिस में बतौर कांस्टेबल हुआ था। फरवरी माह से वह पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज (PTC) डरोह, कांगड़ा में अपनी ट्रेनिंग ले रही थीं। परिवार खुश था कि बेटी अब उनका मजबूत सहारा बनेगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ट्रेनिंग के दौरान नेहा की तबीयत अचानक बिगड़ी। शुरुआती जांच में अल्सर की शिकायत मिलने पर उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार रात नेहा जिंदगी की जंग हार गईं और हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गईं।
सोमवार को जब नेहा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया। पुलिस विभाग की टुकड़ी ने अपनी जांबाज साथी को गार्ड ऑफ ऑनर और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी, लेकिन जैसे ही अंतिम संस्कार की रस्में पूरी हो रही थीं, तभी मोबाइल पर एक मैसेज आया…नेहा की पहली सैलरी खाते में जमा हो गई थी। वह कमाई, जिससे नेहा अपने माता-पिता के लिए खुशियां खरीदना चाहती थीं, वह उसके जाने के बाद आई। यह खबर जिसने भी सुनी, उसका गला भर आया।
पुलिस अधिकारियों ने नेहा को एक अनुशासित और होनहार जवान बताया। दुख की इस घड़ी में विभाग ने शोक संतप्त परिवार को तत्काल सहायता प्रदान की है। पुलिस वेलफेयर फंड से 35,000 रुपए और रिटायरमेंट फंड से 25,000 रुपए की राशि परिजनों को सौंपी गई है। नेहा के जाने से न सिर्फ एक परिवार का दीपक बुझा है, बल्कि प्रदेश ने एक होनहार बेटी खो दी है। उसकी पहली कमाई अब उसकी याद बनकर रह गई है।







