कहते हैं कि जब रगों में देशभक्ति का खून दौड़ रहा हो और दिल में मातृभूमि की सेवा का जज्बा हो तो दुनिया की कोई भी दौलत या ऐशो-आराम आपको रोक नहीं सकता। हिमाचल प्रदेश के एक होनहार युवा ओम गौतम ने इसी बात को सच साबित कर दिखाया है। बिलासपुर जिले के बरठीं गांव के रहने वाले ओम गौतम ने फ्रांस की एक मल्टीनेशनल कंपनी के लाखों रुपए के शानदार पैकेज को ठोकर मार दी, ताकि वह भारतीय सेना की ऑलिव ग्रीन वर्दी पहन सकें। ओम गौतम का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर हुआ है। उनकी इस शानदार सफलता से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।
कॉर्पोरेट की चमक-दमक पर भारी पड़ा देशप्रेम
आज के दौर में जहां युवा इंजीनियरिंग करने के बाद लाखों-करोड़ों के पैकेज और विदेशों में सैटल होने का सपना देखते हैं, वहीं ओम गौतम ने एक अलग ही रास्ता चुना। एनआईटी से बीटेक करने के बाद ओम को फ्रांस की एक जानी-मानी मल्टीनेशनल कंपनी से एक बेहद आकर्षक और लाखों रुपए के वेतन का ऑफर मिला था। अगर ओम चाहते तो एक शानदार और ऐशो-आराम वाली जिंदगी जी सकते थे, लेकिन उन्होंने उस विदेशी नौकरी और लाखों के पैकेज को ठुकरा दिया और देशसेवा का रास्ता चुना, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की।
पढ़ाई में शुरू से ही रहे अव्वल, NIT हमीरपुर से की बीटैक
ओम गौतम की शैक्षणिक यात्रा शुरू से ही असाधारण रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा शिमला के प्रतिष्ठित डीएवी लक्कड़ बाजार से पूरी की। 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 93 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान एनआईटी हमीरपुर से बीटेक की डिग्री हासिल की।
परिवार के संस्कारों और मार्गदर्शन का बहुत बड़ा हाथ
ओम की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत के साथ-साथ उनके परिवार के संस्कारों और मार्गदर्शन का बहुत बड़ा हाथ है। उनके पिता केशव गौतम वर्तमान में शिक्षा विभाग में उपनिदेशक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, उनकी माता रेखा गौतम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वरिष्ठ डाटाबेस विश्लेषक के पद पर तैनात हैं। ओम की एक छोटी बहन भी है, जो वर्तमान में डीएवी लक्कड़ बाजार में 11वीं कक्षा की छात्रा है।
युवाओं के लिए बन गए मिसाल
एक सफल इंजीनियर होने के बावजूद सुख-सुविधाओं को छोड़कर भारतीय सेना में जाने का ओम गौतम का यह साहसिक निर्णय, आज के युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि असली हीरो वह नहीं जो सिर्फ अपने लिए जिए, बल्कि वह है जो देश के लिए कुछ कर गुजरने का संकल्प ले। ओम की इस उपलब्धि पर पूरे प्रदेश से उन्हें और उनके परिवार को बधाइयां मिल रही हैं।







