पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय तनाव का असर अब हिमाचल प्रदेश में भी महसूस किया जाने लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है। इसके साथ ही जरूरी वस्तुओं के दामों में भी उछाल देखा जा रहा है। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह से सतर्क हो गई है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्रदेश में ईंधन का कोई फौरी संकट नहीं है, लेकिन भविष्य में वैश्विक हालात का असर पड़ना तय है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के पास केवल करीब 15 दिनों का पेट्रोल-डीजल का बफर स्टॉक मौजूद है। इस सीमित स्टॉक और अंतर्राष्ट्रीय अस्थिरता को देखते हुए राज्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
पेट्रोल-डीजल के संभावित संकट के साथ-साथ प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी (LPG) गैस की कमी भी सामने आने लगी है। राज्य के कई हिस्सों से शिकायतें आ रही हैं कि होटल, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को गैस सिलेंडर मिलने में भारी दिक्कतें हो रही हैं। इससे सीधा असर पर्यटन और खान-पान के कारोबार पर पड़ रहा है। हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी गैस (रसोई गैस) की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह सामान्य है और घरों में गैस की कोई किल्लत नहीं है।
ऊर्जा संकट की इस आहट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में ईंधन की सप्लाई और स्टॉक की रोजाना (दैनिक आधार पर) समीक्षा की जाए। राज्य सरकार का प्रयास है कि किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए एडवांस में प्लानिंग की जाए ताकि प्रदेश की जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े। सीएम ने जनता से अपील की है कि फिलहाल पैनिक (घबराने) करने की आवश्यकता नहीं है, सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।







