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हिमाचल: चिट्टे का धंधा और बैंक से गद्दारी…तो भूल जाइए प्रधानी की तैयारी! विधानसभा में पास हुआ सख्त कानून

हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों से पहले विधानसभा के बजट सत्र से एक ऐसी खबर आई है, जिसने चुनाव लड़ने का सपना देख रहे कई सफेदपोशों की नींद उड़ा दी है। हिमाचल विधानसभा ने बिना किसी लंबी बहस के पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 पास कर दिया है। राज्यपाल की मुहर लगते ही यह कानून बन जाएगा और इसके साथ ही प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों की राजनीति हमेशा के लिए बदल जाएगी।

इस नए कानून की सबसे बड़ी और अहम बात यह है कि अब नशा तस्करी से जुड़े लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। देवभूमि के युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने वाले तस्करों पर यह एक बड़ी राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक है। सरकार का साफ मानना है कि जो लोग समाज में जहर घोल रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर जनप्रतिनिधि बनने का हक नहीं है। इससे गांवों में एक साफ-सुथरा और स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित हो सकेगा।

कानून को इतना सख्त बनाया गया है कि इसमें किसी भी तरह के बचाव का रास्ता नहीं छोड़ा गया है। यदि कोई व्यक्ति खुद को साफ-सुथरा बताकर चुनाव जीत भी जाता है, लेकिन बाद में अगर उसके खिलाफ नशा तस्करी के आरोप तय हो जाते हैं, तो उसकी कुर्सी तुरंत छिन जाएगी। यह कड़ा नियम ग्राम पंचायत के प्रधान से लेकर जिला परिषद के सदस्य तक सब पर समान रूप से लागू होगा।

सरकार की सख्ती सिर्फ नशा माफिया तक सीमित नहीं है। अगर कोई व्यक्ति सहकारी बैंकों या सोसाइटियों का डिफाल्टर है (जिसने कर्ज लेकर नहीं चुकाया), या फिर पंचायत के ऑडिट में उस पर पैसों की रिकवरी निकली है, तो ऐसे लोग भी चुनाव लड़ने के अयोग्य माने जाएंगे। सीधा सा संदेश है—अगर आप आर्थिक रूप से दागी हैं, तो जनता के पैसों की रखवाली आप नहीं कर सकते।

इसके अलावा, ग्राम सभा की बैठकों को लेकर भी एक बड़ा और व्यावहारिक बदलाव किया गया है। अब तक ग्राम सभा के कोरम (न्यूनतम उपस्थिति) के लिए कुल परिवारों की संख्या गिनी जाती थी, लेकिन नए संशोधन के बाद अब कुल मतदाताओं की 10 प्रतिशत उपस्थिति को ही कोरम के लिए पर्याप्त मान लिया जाएगा। इससे ग्राम सभा की बैठकें आसानी से हो सकेंगी और विकास कार्यों में अड़चन नहीं आएगी।

प्रदेश में जल्द ही करीब 3600 पंचायतों में चुनाव होने हैं। हर बार इन चुनावों में हजारों की संख्या में उम्मीदवार ताल ठोकते हैं। लेकिन इस बार, चुनावी रणभेरी बजने से पहले ही यह नया कानून हजारों ‘दागी’ उम्मीदवारों को मैदान से बाहर कर देगा। चुनावी माहौल के बीच लिया गया सरकार का यह फैसला साफ बता रहा है कि हिमाचल अब गांव की सत्ता सिर्फ साफ-सुथरे और ईमानदार हाथों में ही सौंपना चाहता है।

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Author: Desk

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