वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हिमाचल: सरकार का बड़ा कदम, चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए गए ताे नहीं लड़ सकेंगे पंचायती राज चुनाव

हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति अब पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ । इस संबंध में 19 जनवरी को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि नशे के कारोबार से अर्जित की गई संपत्तियों को न केवल जब्त किया जाएगा, बल्कि उन पर बुलडोजर भी चलाया जाएगा।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि नशे की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति बनाने के उद्देश्य से 21 और 22 जनवरी को प्रदेश की सभी 3577 पंचायतों में विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्थानीय लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा। सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्र (बॉर्डर एरिया) की 264 पंचायतों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा है, जहां विशेष निगरानी और जागरूकता अभियान चलेगा। समन्वय स्थापित करने के लिए हर पंचायत के नजदीकी स्कूल के प्रिंसीपल को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।

मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि चिट्टे से जुड़ी सटीक सूचना देने वालों के लिए इनाम की व्यवस्था शुरू कर दी गई है और उनकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। वहीं, युवाओं का ध्यान नशे से हटाकर खेलों की ओर लगाने के लिए फरवरी के पहले सप्ताह से पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक खेल टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए 21-21 लाख रुपये की बड़ी इनामी राशि रखी गई है।

सरकार ने नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। मंत्री ने बताया कि सभी विभागों से उन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का डेटा मंगवा लिया गया है जो नशा करते हैं या इसके कारोबार में शामिल हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मंत्री ने अपील की है कि हिमाचल को नशामुक्त बनाने के लिए हर पंचायत और परिवार को साथ आना होगा।

प्रैस वार्ता के दौरान अनिरुद्ध सिंह ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा अधिकारियों के खिलाफ दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। अधिकारियों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में तैनात अधिकारी लीगल काम करने से कभी मना नहीं करते। इस तरह की बयानबाजी से उनका मनोबल टूटता है। उन्होंने कहा कि काम करवाने का तरीका आना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर अधिकारी बाहरी राज्यों के होने के बावजूद कोई परेशानी खड़ी नहीं करते।

Desk
Author: Desk

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें
error: Content is protected !!