हिमाचल प्रदेश की सर्पीली और दुर्गम पहाड़ी सड़कों पर एक बार फिर मानवीय लापरवाही बड़ी तबाही का कारण बनते-बनते रह गई। शिमला से चिड़गांव जा रही एक निजी बस उस वक्त हादसे का शिकार हो गई, जब चालक ने टायर पंक्चर होने के बावजूद वाहन को नहीं रोका। गनीमत यह रही कि अनियंत्रित होकर सड़क किनारे नाली में जा फंसी, जिससे 20 यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और बस में सवार यात्रियों के अनुसार दुर्घटना स्थल से करीब एक किलोमीटर पहले ही बस का पिछला टायर पंक्चर हो गया था। यात्रियों ने खतरे को भांपते हुए चालक से बार-बार बस रोकने का आग्रह किया, लेकिन चालक ने मशविरे को अनसुना कर दिया और बस को धीरे-धीरे आगे बढ़ाता रहा। जैसे ही बस छराबड़ा और कुफरी के बीच पहुंची तो मोड़ों वाली खतरनाक सड़क पर संतुलन बिगड़ने के कारण बस अचानक अनियंत्रित हो गई। बस जैसे ही सड़क किनारे नाली में लुढ़की तो यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। झटके और खिड़कियों के कांच टूटने के कारण महिलाओं और बुजुर्गों सहित कई यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों ने राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सभी 20 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिलाया गया है। बड़ा सवाल ये है कि यदि बस नाली की जगह दूसरी तरफ खाई में लुढ़क जाती, तो इस लापरवाही का अंजाम बेहद खौफनाक हो सकता था। पहाड़ी रास्तों पर तकनीकी जांच और चालक की सतर्कता ही सुरक्षा की एकमात्र गारंटी है, जिसे यहां पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।







