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Video: 19 साल की उम्र, 2 महीने की नौकरी और अमर बलिदान, साथियों को बचाते हुए शहीद हुआ देवभूमि का लाल

देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित नौगांव (आसुई) में आज हर आंख नम है और हर सीना गर्व से चौड़ा। महज 19 साल की उम्र में, जब युवा अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, अग्निवीर सचिन ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर शहादत का रास्ता चुना। 2 महीने पहले जिस बेटे को मां ने ‘चिरंजीवी’ होने का आशीर्वाद देकर भेजा था, वह आज तिरंगे में लिपटकर घर लौटा।

जानकारी के मुताबिक सचिन ने बचपन से ही फौजी बनने का सपना देखा था। वह पहली ही कोशिश में बतौर अग्निवीर सेना में भर्ती हुए। ट्रेनिंग पूरी कर दो महीने पहले ही वह घर आए थे और दिसंबर में उन्हें पोस्टिंग मिली थी। बीते दिनों एक ऑपरेशन के दौरान उनकी टुकड़ी का सामना दुश्मनों से हो गया। अदम्य साहस का परिचय देते हुए सचिन ने अपने साथी सैनिकों की जान बचाई और खुद दुश्मन की गोली का शिकार होकर वीरगति को प्राप्त हो गए।

जब पूरा देश होली के जश्न में डूबा था, तब सचिन के घर उनकी शहादत की खबर पहुंची। दो महीने पहले जिन फूल-मालाओं से परिवार ने ट्रेनिंग पूरी कर लौटे बेटे का स्वागत किया था, आज वही मालाएं उनकी तस्वीर पर चढ़ी हैं। सचिन अपने माता-पिता के बेहद लाडले थे। उनकी शहादत ने परिवार को तोड़ दिया है, लेकिन उनकी वीरता पर उन्हें नाज है।

शहीद का पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा, तो मां ने बेटे का सेहरा सजाया और पिता ने कांपते हाथों से सैल्यूट कर विदा किया। तिरंगे में लिपटे बेटे को देख पिता फफक कर रो पड़े। पूरे सैन्य सम्मान के साथ सचिन का अंतिम संस्कार किया गया। सचिन का जाना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की क्षति है। 19 साल का यह जांबाज साबित कर गया कि उम्र नहीं, जज्बा बड़ा होना चाहिए।

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Author: Desk

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