हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी की बाट जोह रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की कमी को दूर करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सरकार ने सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के 870 पदों को भरने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से न केवल बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्कूलों में ठप्प पड़ी खेल गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
जॉब ट्रेनी योजना के तहत होगी भर्ती, 21,500 रुपए मिलेगा वेतन
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन 870 पदों को नियमित आधार पर न भरकर जॉब ट्रेनी योजना के अंतर्गत भरा जाएगा। सरकार ने इन पदों के लिए वेतनमान भी निर्धारित कर दिया है। चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को प्रतिमाह 21,500 रुपए का मानदेय दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा निदेशालय को सरकार की ओर से हरी झंडी मिल गई है और विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई और तैयारियां शुरू कर दी हैं।
भर्ती के नियम और समय सीमा
इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के दायरे में होगी। यह भर्तियां कार्मिक विभाग द्वारा जारी 19 जुलाई 2025 की अधिसूचना के तहत लागू जॉब ट्रेनी नीति और संबंधित पदों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार की जाएंगी। चयन प्रक्रिया किसी निर्धारित भर्ती एजेंसी के माध्यम से पूरी की जाएगी। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि अगले वित्तीय वर्ष के दौरान इन सभी पदों पर भर्ती प्रक्रिया संपन्न कर ली जाए, ताकि नए शैक्षणिक सत्रों में स्कूलों को खेल शिक्षक मिल सकें।
हाईकोर्ट के दखल के बाद जागी सरकार
गौरतलब है कि प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों समेत कई सरकारी स्कूलों में पीईटी के पद सालों से खाली पड़े थे। शारीरिक शिक्षक न होने की वजह से विद्यार्थियों का शारीरिक विकास और खेल प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा था। यह मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था। न्यायालय के निर्देशों और जमीनी हकीकत को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इन खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि अदालती आदेशों का पालन हो सके और छात्रों का नुकसान न हो।
खेल संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि एक साथ 870 पीईटी शिक्षकों की नियुक्ति से प्रदेश के स्कूलों में खेल संस्कृति में बड़ा बदलाव आएगा। जब स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक होंगे, तो विद्यार्थियों को नियमित रूप से खेल का प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे राज्य स्तर पर नए खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिलेगी और युवाओं को नशों से दूर रखकर खेलों की ओर जोड़ने का सरकार का अभियान भी सफल हो सकेगा।







