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नौकरी का झांसा देकर पंजाब से मनाली पहुंचाईं गरीब लड़कियां…फिर कुचल डाले अरमान, देह व्यापार मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मनाली में नौकरी का झांसा देकर गरीब लड़कियों से जबरन देह व्यापार करवाने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज करते हुए मानव तस्करी को समाज के लिए बड़ा खतरा बताया है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने आरोपियों के कृत्य पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पैसों के लिए किसी को वेश्यावृत्ति में धकेलना इंसानियत का सबसे बड़ा पतन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के अपराध इंसानी शरीर को महज एक वस्तु बनाकर पेश करते हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाना और उसे ऐसे दलदल में धकेलना एक गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के अनुसार यह एक संगठित गिरोह था जो बाहरी राज्यों विशेषकर पंजाब की गरीब और जरूरतमंद लड़कियों को अपना शिकार बनाता था। आरोपी इन लड़कियों को मनाली में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच देकर लाते थे, लेकिन मनाली पहुंचने के बाद उनके अरमानों को कुचल दिया जाता था और उन्हें डरा-धमका कर जबरन देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था।

इस रैकेट का खुलासा 22 दिसम्बर को हुआ था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मनाली के मॉल रोड और बस स्टैंड इलाके में एक संगठित देह व्यापार का गिरोह सक्रिय है। पुलिस ने जाल बिछाते हुए अपने नकली ग्राहकों को चिह्नित (मार्क किए हुए) नोट देकर आरोपियों के पास भेजा। जैसे ही सौदा तय हुआ, पुलिस ने तुरंत दबिश दी और आरोपी संदीप कौर, संतोष, कविता खातून समेत अन्य को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से पुलिस के वही चिह्नित नोट भी बरामद हुए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह कोई साधारण मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है। आरोपी लंबे समय से इस अवैध धंधे में लिप्त थे और इसी से मोटी कमाई कर रहे थे। सभी तथ्यों और सबूतों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज के लिए खतरनाक साबित होगा। अदालत ने सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले को मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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Author: Desk

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