उत्तर भारत के विश्व विख्यात शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी के दरबार में इन दिनों आस्था, भक्ति और नि:स्वार्थ समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। माता के चमत्कार और आशीर्वाद से मन्नतें पूरी होने पर पंजाब से आए श्रद्धालुओं ने दरबार में बहुमूल्य भेंट अर्पित की हैं। एक भक्त ने जहां 11 तोले सोने का छत्र चढ़ाया, वहीं दूसरे श्रद्धालु ने 750 ग्राम चांदी का भव्य छत्र माता के चरणों में समर्पित किया। इन दोनों ही भेंटों की सबसे खास बात यह रही कि दानकर्ताओं ने इसे पूरी तरह से गुप्त दान रखा और अपनी पहचान उजागर न करने का आग्रह किया।
11 तोले सोने के छत्र से सजा माता का दरबार
जानकारी के अनुसार, पंजाब से एक श्रद्धालु अपने पूरे परिवार के साथ माता के दरबार में नतमस्तक होने पहुंचा था। उन्होंने पवित्र गर्भगृह में माता की पावन पिंडी के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर प्रशासन को 11 तोले सोने का एक बेहद सुंदर छत्र सौंपा। श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने माता रानी से एक विशेष मन्नत मांगी थी, जिसके पूरा होने की अपार खुशी में उन्होंने यह बेशकीमती भेंट अर्पित की है। दानकर्ता ने मंदिर प्रशासन से विशेष रूप से निवेदन किया कि उनका या उनके परिवार का नाम किसी भी रूप में सार्वजनिक न किया जाए।
फिरोजपुर के भक्त ने चढ़ाया 750 ग्राम चांदी का छत्र
वहीं, शनिवार को पंजाब के ही फिरोजपुर जिले के गुरु हर सहाय से आए एक अन्य श्रद्धालु ने अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट करते हुए पौना किलो (750 ग्राम) चांदी का छत्र माता को भेंट किया। इस श्रद्धालु का भी कहना था कि माता के आशीर्वाद से उनका एक बहुत बड़ा कार्य संपन्न हुआ है। पुजारियों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चारण और विशेष पूजा-अर्चना करवाने के बाद, आधुनिक कारीगरी से तैयार किए गए इस भव्य चांदी के छत्र को माता की पावन पिंडी के ऊपर सुसज्जित कर दिया गया। इस भक्त ने भी अपनी पहचान गुप्त रखते हुए नि:स्वार्थ भक्ति की मिसाल पेश की।
चिंताओं को हरने वाली हैं माता चिंतपूर्णी
बिना किसी दिखावे के किए गए ये गुप्त दान बताते हैं कि माता के प्रति भक्तों की श्रद्धा कितनी गहरी है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह पावन धाम हिंदू धर्म के 51 पवित्र शक्तिपीठों में प्रमुख स्थान रखता है। कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव सती के मृत शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता के शरीर को काटा था। मान्यता है कि इसी पवित्र स्थान पर माता सती के चरण गिरे थे। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस दरबार में आता है, मां उसकी सभी चिंताओं को हर लेती हैं, इसीलिए इस धाम को ‘चिंतपूर्णी’ कहा जाता है। हर साल पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां माता का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और मुरादें पूरी होने पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी व अन्य आभूषण भेंट स्वरूप अर्पित करते हैं।







