हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र के एक पशुपालक द्वारा सड़क पर दूध बहाने की घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। किसान रवि सैनी ने हिमाचल मिल्कफैड के चक्कर प्लांट के गेट पर करीब 500 लीटर दूध बहाकर अपना रोष प्रकट किया। किसान ने खुद इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर सांझा किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
किसान का आरोप- प्लांट प्रबंधन 2 दिन से नहीं खरीद रहा था दूध
किसान रवि सैनी का आरोप है कि चक्कर प्लांट प्रबंधन पिछले दो दिनों से उनका दूध नहीं खरीद रहा था। रवि रोजाना लगभग 500 लीटर दूध की आपूर्ति करते हैं और खरीद न होने के कारण उन्हें करीब 50 हजार रुपए का सीधा नुक्सान उठाना पड़ा। मजबूरी और हताशा में आकर उन्होंने सारा दूध सड़क पर बहा दिया।
डेयरी फार्मिंग के लिए लिया है 1 करोड़ का कर्ज
रवि सैनी ने अपनी परेशानी सांझा करते हुए बताया कि वे पिछले चार वर्षों से डेयरी फार्मिंग के व्यवसाय से जुड़े हैं और उनके पास लगभग 30 गायें हैं। उन्होंने यह काम करीब एक करोड़ रुपए का कर्ज लेकर शुरू किया था। उन्हें हर महीने बैंक की बड़ी किस्त चुकानी पड़ती है। उनका कहना है कि यदि प्लांट द्वारा दूध की खरीद बंद रहती है, तो उनके लिए कर्ज चुकाना असंभव हो जाएगा और उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा जाएगी।
सरकारी घोषणाओं और बढ़ी हुई कीमतों पर उठे सवाल
इस वायरल वीडियो के बाद लोग सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के दावों पर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही के राज्य बजट में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गाय और भैंस के दूध के दाम में 10-10 रुपए प्रति लीटर की बढ़ौतरी की घोषणा की थी, लेकिन किसान का सीधा सवाल है कि जब सरकारी प्लांट स्तर पर ही उनका दूध नहीं लिया जा रहा, तो कागजों पर बढ़ी हुई इन कीमतों का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा?
प्लांट प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष, पुलिस कार्रवाई की दी चेतावनी
इस पूरे विवाद पर चक्कर प्लांट के प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि प्लांट की अधिकतम क्षमता एक लाख लीटर है, जो पूरी हो चुकी है और इससे अधिक दूध स्टोर करना संभव नहीं है। इसी मजबूरी के कारण अब एरिया (क्षेत्र) के अनुसार दूध की खरीद की जा रही है। शर्मा के मुताबिक एक सप्ताह पहले ही पशुपालकों के साथ बैठक कर उन्हें इस नई व्यवस्था से अवगत करा दिया गया था। उन्होंने दूध बहाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं और इस कृत्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई जाएगी।
डेयरी किसानों के भविष्य पर मंडराता संकट
इस घटना ने हिमाचल प्रदेश में डेयरी फार्मिंग से जुड़े हजारों किसानों की चिंताओं को सतह पर ला दिया है। यह एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा करता है कि जब किसान मेहनत कर उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर खरीद और स्टोरेज की पुख्ता व्यवस्था नहीं है, तो इन पशुपालकों का भविष्य और उनका निवेश कैसे सुरक्षित रहेगा।







