हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक युवती की बेरहमी से की गई हत्या ने न केवल देवभूमि को दहला दिया है, बल्कि इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रियाओं ने समाज के एक वर्ग की कुरुप सोच को भी उजागर कर दिया है। जहां एक ओर पूरा प्रदेश इस दरिंदगी से आक्रोश में है, वहीं कुछ लोग सार्वजनिक मंचों पर मृतका के चरित्र और मर्यादा पर सवाल उठाकर दुख की इस घड़ी में परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
क्रूरता की सारी हदें पार
मंडी में एक सनकी युवक ने जिस बेरहमी से एक बेटी को मौत के घाट उतारा, उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। सरेआम किसी इंसान को सब्जियों की तरह काट देना उस अपराधी की दरिंदगी को दर्शाता है। इस हत्याकांड ने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया है, लेकिन विडंबना देखिए कि न्याय की मांग करने की बजाय कुछ लोग इस कृत्य को जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर शर्मनाक टिप्पणियां
हत्या की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, कमेंट्स की बाढ़ आ गई। जहां अधिकांश लोग हत्यारे को फांसी देने की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स की सोच देखकर सिर शर्म से झुक जाता है। एक युवक ने कमेंट में लिखा, “चलो किसी ने तो अच्छा काम किया, ऐसी लड़की के साथ ऐसा ही होना चाहिए।” इस तरह की बातें न केवल अपराधी का मनोबल बढ़ाती हैं, बल्कि समाज में नफरत को भी बढ़ावा देती हैं।

जब महिला ही बनी महिला की दुश्मन
हद तो तब हो गई जब इस मामले में महिलाओं की ओर से भी संवेदनहीन प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक महिला यूजर ने लिखा, “लड़कियां आजकल अपनी मर्यादा भूल गई हैं, मारने के पीछे कोई बड़ा कारण होना।” यह टिप्पणी दर्शाती है कि आज भी समाज का एक हिस्सा लड़कियों की आजादी और अस्मिता को सिर्फ चौखट के भीतर ही सुरक्षित देखना चाहता है। मृतका को सहानुभूति देने की बजाय उसे ही कटघरे में खड़ा करना इंसानियत के गिरते स्तर का प्रमाण है।

सवाल: कहां गई इंसानियत?
सवाल यह उठता है कि आखिर हम किस मिट्टी के बने हैं? क्या किसी भी वजह से किसी की जान लेना जायज हो सकता है? जो लोग आज मोबाइल स्क्रीन के पीछे बैठकर अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं, क्या उन्होंने एक पल के लिए भी उस पीड़ित परिवार के बारे में सोचा, जिनके घर की बेटी अब कभी लौटकर नहीं आएगी? जब परिवार अपनी संतान को खोने के गम में डूबा हो, तब समाज की ऐसी मानसिक दरिंदगी पीड़ित पक्ष के लिए असहनीय पीड़ा बन जाती है।
किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं
वजह चाहे जो भी हो, किसी को भी कानून हाथ में लेने या किसी की बेरहमी से हत्या करने का अधिकार नहीं है। आज आवश्यकता है कि सोशल मीडिया पर जहर उगलने वाले ऐसे लोगों को सद्बुद्धि मिले और प्रशासन कड़ी कार्रवाई कर इस संदेश को साफ करे कि दरिंदगी और उसे समर्थन देने वाली सोच, दोनों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। ईश्वर मृत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिवार को यह अपार कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करे।







