छोटी उम्र में सिर से माता-पिता का साया उठ जाने के बाद एक युवक की जिंदगी में सिर्फ सन्नाटा और संघर्ष बचा था, लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार इस अनाथ युवक के लिए फरिश्ता बनकर आई। सरकार ने न सिर्फ उसे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर गोद लिया, बल्कि उसे पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा भी कर दिया। आज यह युवक अपनी खुद की दुकान का मालिक है। शिमला के डीसी ने खुद इस दुकान का उद्घाटन कर युवक का मुंह मीठा करवाया और उसे सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
यह भावुक कर देने वाली कहानी शिमला की ग्राम पंचायत मेहली के पुजारली निवासी आकाश की है। आकाश की जिंदगी में मुश्किलों का दौर 19 दिसम्बर 2020 को शुरू हुआ, जब उनके पिता चंद्र कुमार शर्मा का अचानक निधन हो गया। परिवार इस बड़े सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि ठीक एक साल बाद दिसम्बर 2021 में मां नीतू शर्मा भी इस दुनिया को छोड़ गईं। माता-पिता दोनों को खो देने के बाद आकाश और उनके भाई प्रकाश की दुनिया जैसे थम गई। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे की पढ़ाई कैसे होगी और जिंदगी का गुजारा कैसे चलेगा।
इसी अंधकार के बीच साल 2023 में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना’ आकाश के जीवन में उम्मीद की नई किरण लेकर आई। सरकार ने योजना के तहत आकाश को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का दर्जा दिया। इसके बाद सरकार ने सिर्फ एक योजना की तरह नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह आकाश की जिम्मेदारी उठाई और उसे हर महीने 4,000 रुपये की आर्थिक सहायता (पॉकेट मनी) मिलनी शुरू हो गई। आर्थिक संबल मिलने के बाद आकाश ने अपने सपनों को फिर से बुनना शुरू किया। उसने पीजीडीसीए का डिप्लोमा किया, जिसकी करीब 23 हजार रुपए की पूरी फीस सरकार ने वहन की। इसके बाद, आकाश को मोबाइल रिपेयरिंग की विशेष ट्रेनिंग के लिए सरकार के खर्च पर चंडीगढ़ भेजा गया, ताकि वह हुनर सीखकर अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के ‘स्टार्टअप फंड’ के तहत आकाश को अब तक 1 लाख 40 हजार रुपए की सहायता राशि जारी की जा चुकी है, जबकि 60 हजार रुपए की अंतिम किस्त के लिए आवेदन किया गया है। इसी सरकारी मदद से आकाश ने पुजारली में अपनी मोबाइल रिपेयर शॉप “द फर्स्ट इंस्पेक्शन” शुरू कर दी है। मंगलवार को शिमला के डीसी अनुपम कश्यप ने इस दुकान का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर भावुक होते हुए आकाश ने कहा कि अगर सुखाश्रय योजना नहीं होती, तो वह कभी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता। आज उसके पास अपनी दुकान और अपना सम्मान है, जो सरकार के सहारे की वजह से मुमकिन हो पाया है।
डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना ने इन बेसहारा बच्चों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव किया है। आज आकाश जैसे युवा अपने पैरों पर खड़े होकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले शिमला जिले में अब तक 8 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ इस योजना के माध्यम से अपना खुद का स्वरोज़गार शुरू कर चुके हैं।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2023 में इस योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत राज्य के करीब 6,000 अनाथ और बेसहारा बच्चों को संरक्षण दिया गया है। योजना के तहत 14 साल तक 1,000 रुपए, 14 से 18 साल तक 2,500 रुपए और 18 से 27 साल तक 4,000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। इसके साथ ही 27 साल की उम्र तक उच्च शिक्षा का पूरा खर्च, हॉस्टल न होने पर पीजी के लिए 3,000 रुपए और स्वरोजगार, घर बनाने व विवाह के लिए भी सरकार आर्थिक सहायता देती है। आकाश की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर सरकार और समाज का सहारा मिल जाए, तो टूटे हुए सपने भी नई उड़ान भर सकते हैं।








