सरकारी स्कूलों में परोसे जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बाड़ी प्राइमरी स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील में परोसी गई खीर खाने से 30 से 40 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और अभिभावकों में भारी रोष है।
जानकारी के अनुसार स्कूल में मंगलवार को बच्चों को मिड-डे मील में खीर दी गई थी। शाम को जब छुट्टी हुई और बच्चे घर की तरफ निकले तो अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालात इतने खराब हो गए कि कुछ बच्चे तो स्कूल के बाहर ही बेहोश अवस्था में गिर पड़े। प्रभावित होने वाले बच्चे मुख्य रूप से जैंडी, बाड़ी, बशकोला, रंखड़ू और बाजगाड़ी सहित आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबर जैसे ही गांव में फैली, पंचायत प्रधान कमलाकांत और उपप्रधान ललित तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मदद से आनन-फानन में बीमार बच्चों को सीएचसी पतलीकूहल अस्पताल पहुंचाया। बच्चों के बीमार होने की खबर सुनते ही परिजन भी बदहवास हालत में अस्पताल दौड़ पड़े।
सीएचसी पतलीकूहल में बच्चों का इलाज कर रहे डॉ. मोहित शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर यह मामला पूरी तरह से फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत हो रहा है। इसके अलावा, चिकित्सकों ने दूषित पानी के सेवन से भी इंफेक्शन होने की आशंका जताई है। हालांकि, बीमारी का असली कारण मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। वहीं, बीएमओ नग्गर कर्ण ने आश्वस्त किया है कि सभी बच्चों का इलाज जारी है और चिकित्सकों की एक विशेष टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है।
बच्चों की जान जोखिम में देख परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। अस्पताल पहुंचे अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन की इस बड़ी लापरवाही पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मिड-डे मील में इस्तेमाल की गई खाद्य सामग्री और पानी के तुरंत सैंपल लिए जाएं और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने भी सीएचसी पतलीकूहल का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों और उनके परेशान परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। विधायक ने मौके पर मौजूद चिकित्सकों से बच्चों के स्वास्थ्य और उन्हें दी जा रही उपचार व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली और बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं, लेकिन इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।








