वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हिमाचल में ठगी का हैरान कर देने वाला मामला, मोबाइल हैंग हुआ और खाते से उड़ गए 2 लाख रुपए

साइबर अपराध की दुनिया से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो पुलिस और बैंकों की चेतावनियों को धता बता रहा है। आमतौर पर साइबर सुरक्षा एजेंसियां ओटीपी सांझा न करने और अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह देती हैं, लेकिन राजधानी शिमला में एक ऐसा मामला दर्ज हुआ है, जहां पीड़ित ने इनमें से कोई भी गलती नहीं की, फिर भी उनके खातों से करीब 2 लाख रुपए उड़ा लिए गए। इस घटना ने डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा प्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

समरहिल निवासी इंद्रजीत द्वारा साइबर सैल में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार यह घटना पूरी तरह से बिना किसी मानवीय भूल के प्रतीत होती है। पीड़ित का दावा है कि शाम करीब 7:30 बजे उनका मोबाइल फोन अचानक हैंग हो गया और स्क्रीन ने काम करना बंद कर दिया। इसी दौरान स्क्रीन पर बैंक बैलेंस चैक करने का एक पॉप-अप मैसेज फ्लैश हुआ। जब पीड़ित ने किसी तरह अपना अकाऊंट चैैक किया, तो पता चला कि उनके भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के खातों से कुल 1 लाख 99 हजार रुपए निकाले जा चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया में न तो उनके पास कोई फोन कॉल आया, न कोई ओटीपी मिला और न ही उन्होंने किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था।

इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू आईसीआईसीआई बैंक की सावधि जमा (एफडी) को लेकर है। साइबर अपराधियों ने न केवल सेविंग अकाऊंट में सेंध लगाई, बल्कि ऑनलाइन एफडी को भी तुड़वा दिया और उसमें से 1 लाख रुपए निकाल लिए। बिना मल्टी फैक्टर ऑथैंटीकेशन के एफडी का इस तरह टूट जाना सीधे तौर पर बैंकिंग सर्वर या एप्लिकेशन की सुरक्षा खामियों की ओर इशारा करता है। घटना के तुरंत बाद इंद्रजीत ने शिमला साइबर सेल में लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि इतनी बड़ी और तकनीकी रूप से जटिल ठगी होने के बावजूद पुलिस का रवैया उदासीन रहा। उन्हें केवल मामले की जांच करने का एक रूटीन आश्वासन दिया गया है।

यह मामला साइबर ठगी के एक नए और उन्नत स्तर का संकेत देता है। पीड़ित का सवाल लाजमी है कि जब बिना किसी मानवीय चूक के, सीधे सिस्टम में घुसपैठ कर एफडी तक तोड़ी जा सकती है, तो आम नागरिक का पैसा बैंकों में कितना सुरक्षित है? फिलहाल पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि ठगों ने बैंकिंग सिक्योरिटी फायरवॉल को कैसे भेदा। लेकिन इस घटना ने रिज़र्व बैंक और बैंकिंग संस्थानों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी जारी कर दी है कि साइबर अपराधी अब सुरक्षा के तरीकों से कई कदम आगे निकल चुके हैं।

Desk
Author: Desk

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें
error: Content is protected !!