नशे की लत किस कदर युवाओं को अपराध के अंधेरे में धकेल रही है, इसका एक खौफनाक उदाहरण हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से सामने आया है। देहरा उपमंडल के ज्वालामुखी क्षेत्र में 19 और 23 साल के दो युवकों ने अपनी नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए एक टैक्सी चालक की जान ले ली। 84 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद टैक्सी चालक मेहर सिंह (मेहर चंद) ने आखिरकार दम तोड़ दिया है। चालक की मौत के बाद देहरा पुलिस ने अब आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस जांच में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि 19 और 23 साल के दोनों आरोपी जो खुंडियां क्षेत्र के रहने वाले हैं टैक्सी चालक मेहर सिंह के लिए कोई अजनबी नहीं थे। दोनों पहले भी कई बार होशियारपुर जाने के लिए मेहर सिंह की टैक्सी किराये पर ले चुके थे। इसी जान-पहचान का फायदा उठाते हुए उन्होंने 16 अप्रैल को होशियारपुर जाने के बहाने टैक्सी बुक की। माना जा रहा है कि आर्थिक लाभ और नशे की अपनी लत को पूरा करने के लिए उन्होंने इस वारदात की पहले से ही योजना बना रखी थी।
सफर के दौरान 16 अप्रैल को कलोहा क्षेत्र के पास किसी बात को लेकर चालक और आरोपियों के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद आरोपियों ने मेहर सिंह को मुख्य मार्ग छोड़कर कामाख्या मंदिर की तरफ जाने वाले एक सुनसान और वैकल्पिक रास्ते पर गाड़ी ले जाने के लिए मजबूर किया। घने जंगल में पहुंचते ही दोनों ने अचानक चालक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जब उन्हें लगा कि वह अभी भी जिंदा है, तो उन्होंने बेरहमी से रस्सी से उसका गला घोंट दिया। उसे मरा हुआ समझकर आरोपियों ने उसकी नकदी लूटी, उंगली से सोने की अंगूठी निकाली और उसे जंगल में ही फैंककर टैक्सी लेकर फरार हो गए।
वारदात के बाद आरोपी टैक्सी लेकर होशियारपुर पहुंचे, वहां वाहन को लावारिस हालत में छोड़ा और बिल्कुल सामान्य तरीके से घर लौट आए ताकि किसी को उन पर शक न हो। इधर, 17 अप्रैल को जब मेहर सिंह घर नहीं लौटा, तो उसके भाई ने पुलिस चौकी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत खोजबीन शुरू की। सुराग मिलने पर खुंडियां के इन दोनों युवकों को हिरासत में लिया गया, जहां कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों टूट गए और पूरा सच उगल दिया।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने करीब 24 घंटे से जंगल में अकेले पड़े मेहर सिंह को अधमरी हालत में खोज निकाला। उसे तुरंत देहरा अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत के चलते उसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (टांडा) रैफर कर दिया गया। करीब तीन महीने (84 दिन) तक मेहर सिंह ने मौत से कड़ा संघर्ष किया, लेकिन इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया है और पूरे इलाके में भारी आक्रोश है।
देहरा के एसपी संदीप धवल ने बताया कि मेहर सिंह के दम तोड़ने के बाद, पुलिस हिरासत में मौजूद दोनों आरोपियों पर दर्ज हत्या के प्रयास के मुकद्दमे को अब हत्या की धाराओं में बदल दिया गया है। पुलिस मामले के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है और एसपी का कहना है कि उपलब्ध सभी साक्ष्यों को अदालत में मजबूती से पेश किया जाएगा ताकि इन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।








