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Video: हिमाचल की इस पंचायत के ऐतिहासिक फैसलों को देश कर रहा सलाम, अमीर-गरीब के लिए बना डाले एक समान नियम

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई उपमंडल के तहत आने वाली धारवा पंचायत ने पूरे देश के सामने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। समाज में बढ़ती फिजूलखर्ची, नशे और दिखावे की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए पंचायत ने कई कड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। इस पंचायत ने एक ऐसा सामाजिक ढांचा तैयार किया है, जहां अमीर और गरीब के बीच की खाई को खत्म कर दिया गया है।

अब इस गांव में किसी भी पिता को अपनी बेटी की शादी के खर्च की चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गांव के लखपति से लेकर एक गरीब व्यक्ति तक को शादी-विवाह में एक ही तरह के नियमों का पालन करना होगा। शादी में अब अधिकतम 100 लोग ही शामिल हो सकेंगे और केवल 15 वाहनों का ही प्रयोग किया जाएगा। यह नियम गांव से जाने वाली और गांव में आने वाली, दोनों बारातों पर समान रूप से लागू होगा। दिखावे को खत्म करने के लिए तय किया गया है कि दुल्हन को केवल तीन ही आभूषण पहनाए जाएंगे, जिनमें नाक की तिल्ली, कान के झुमके और मंगलसूत्र शामिल हैं। गांव में दहेज लेने और देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

शराब और मांसाहार बैन: विवाह समारोहों में शराब और बीयर पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही शादियों में मांसाहारी (नॉनवेज) भोजन और फास्ट फूड बनाने पर भी रोक लगा दी गई है। केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही परोसा जाएगा। ‘रोटियारी’ में घी देने की पुरानी प्रथा को बंद कर दिया गया है। इसके अलावा ‘मामा स्वागत’ रस्म को भी सीमित किया गया है, जिसमें केवल गांव व परिवार के लोग ही शामिल होंगे और यहां भी सिर्फ शाकाहारी भोजन ही परोसा जाएगा। पंचायत ने स्पष्ट किया है कि ये नियम हर ग्रामीण पर लागू होंगे। यदि कोई भी व्यक्ति या परिवार इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो पंचायत उस पर भारी-भरकम जुर्माना लगाएगी।

जानकारी के मुताबिक, शादियों में दिखावे की होड़, बढ़ती महंगाई, खाने की बर्बादी और युवाओं में शराब के बढ़ते चलन को देखते हुए गांव के कुछ युवाओं ने इन कुप्रथाओं को खत्म करने का विचार रखा था। इसके बाद 6 जुलाई को ग्राम सभा की एक विशेष बैठक बुलाई गई। इस बैठक में गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी शामिल हुए। सभी ने एक सुर में माना कि महंगे आयोजनों और लोक-लाज के कारण कई परिवार भारी आर्थिक दबाव (कर्ज) में आ जाते हैं। इसी दबाव से समाज को बाहर निकालने के लिए इन नियमों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई।

आपको बता दें कि धारवा पंचायत के लोग अपनी समझदारी और एकता के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। इस ग्राम पंचायत ने हाल ही में अपने प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्यों को बिना किसी चुनाव के निर्विरोध चुनकर एक नया इतिहास रचा था। अब समाज सुधार के इन नए फैसलों के बाद इस पंचायत की चर्चा पूरे प्रदेश और देश में हो रही है।

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Author: Desk

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