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हिमाचल: सोशल मीडिया कमाई पर सस्पेंड इंस्पैक्टर ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, सरकार सहित 6 पक्षों को बनाया प्रतिवादी

हिमाचल प्रदेश पुलिस के मशहूर ऑर्केस्ट्रा बैंड हारमनी ऑफ द पाइन्स के प्रभारी इंस्पेक्टर विजय कुमार का निलंबन अब एक बड़ा कानूनी विवाद बन गया है। सोशल मीडिया से कथित कमाई के आरोप में निलंबित किए गए इंस्पेक्टर ने पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह पूरा विवाद हारमनी ऑफ द पाइन्स बैंड की डिजिटल लोकप्रियता और उससे जुड़ी कथित कमाई से उपजा है। पुलिस विभाग का आरोप है कि इंस्पेक्टर विजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए व्यक्तिगत आय अर्जित की है, जो कि पुलिस सर्विस रूल्स (आचरण नियमों) का उल्लंघन है। इसी आरोप के आधार पर विभाग ने उन्हें सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच शुरू करने के आदेश जारी किए थे।

अपने निलंबन और विभागीय जांच को अनुचित बताते हुए इंस्पेक्टर विजय कुमार ने हाईकोर्ट से राहत की गुहार लगाई। इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ में हुई। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए सरकार और पुलिस महकमे को निर्देश दिया है कि वे मामले की अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब अदालत के पटल पर रखें।

इंस्पेक्टर विजय कुमार की ओर से दायर इस याचिका में कुल छह बड़े पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। हाईकोर्ट ने जिन अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, उनमें राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आर्म्ड पुलिस एवं ट्रेनिंग) और राज्य के वित्त सचिव शामिल हैं। इसके अलावा प्रथम आर्म्ड पुलिस बटालियन जुंगा के कमांडेंट और मामले के जांच अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

अदालत में चल रही इस कानूनी लड़ाई के समानांतर पुलिस मुख्यालय ने अपनी विभागीय जांच भी तेज कर दी है। इस जांच की जिम्मेदारी पुलिस लाइन भराड़ी के डीएसपी कमल किशोर को सौंपी गई है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे तय समय सीमा के भीतर सभी दस्तावेजों, तथ्यों और सोशल मीडिया से जुड़े रिकॉर्ड्स की बारीकी से पड़ताल कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपें।

डिजिटल युग में सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल और उससे होने वाली कमाई से जुड़े इस अहम मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और पुलिस महकमा अदालत में अपने नियमों का बचाव किस तरह से करते हैं। अगली सुनवाई के बाद ही साफ हो पाएगा कि पुलिस बैंड के इस चर्चित चेहरे को अदालत से कोई फौरी राहत मिलती है या नहीं।

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Author: Desk

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