हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मानसून की मार अब विनाशकारी रूप ले चुकी है। मंगलवार को शाहपुर उपमंडल के तहत आने वाली बोह घाटी में बादल फटने के बाद आई भयंकर बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में स्पैडा और गढ़गून गांव के 6 घर पानी और मलबे के तेज बहाव में बह गए। गनीमत यह रही कि ग्रामीणों ने समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शरण ले ली, जिससे जनहानि टल गई, लेकिन प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावितों तक तत्काल मदद पहुंचाना बन गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही शाहपुर के एसडीएम डॉ. गणेश ठाकुर, राजस्व विभाग और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों के साथ प्रभावित बोह घाटी के लिए रवाना हुए, लेकिन रैस्क्यू ऑप्रेशन मौसम और टूटते पहाड़ों की भेंट चढ़ रहा है। एसडीएम डॉ. ठाकुर ने बताया कि रैस्क्यू टीमों का काफिला डिब्बा और मानेड नाला क्षेत्र के पास फंस गया है, क्योंकि वहां भारी भूस्खलन के कारण सड़क का नामोनिशान मिट गया है। प्रशासन अब मार्ग खोलने के लिए मशीनरी का इस्तेमाल कर रहा है ताकि एसडीआरएफ की टीमें जल्द से जल्द प्रभावित गांव तक पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर सकें और बेघर हुए लोगों को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार तबाही इतनी अचानक आई कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। पहाड़ से एक भयानक धमाके की आवाज आई और उसके तुरंत बाद चट्टानों और गाद का सैलाब घरों पर टूट पड़ा। जिन 6 परिवारों के घर बहे हैं, उनके पास अब अपनी जान के अलावा कुछ नहीं बचा है। प्रशासन अब इन परिवारों के पुनर्वास और हुए नुकसान के विस्तृत आकलन की तैयारी कर रहा है।
आपदा के मद्देनजर प्रशासन ने चेतावनी जारी कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों पर मिट्टी पूरी तरह से ढीली हो चुकी है और लगातार बारिश से किसी भी वक्त भूस्खलन हो सकता है। लोगों को हिदायत दी गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के आसपास जाने का जोखिम कतई न उठाएं।








