हिमाचल प्रदेश में बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के बीच धर्मशाला की एक अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने अपराधियों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत ने रिश्तों को कलंकित करने वाले एक जघन्य अपराध में त्वरित और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म करने वाले रिश्ते के चाचा को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
यह रूह कंपा देने वाला मामला विश्वासघात और दरिंदगी की इंतहा है। पीड़िता ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि रिश्ते में उसका चाचा लगने वाला आरोपी लंबे समय से उसकी मर्जी के खिलाफ उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। आरोपी ने खौफ का ऐसा जाल बुना था कि यदि उसने इस ज्यादती के बारे में किसी को बताया तो वह उसे और उसके पूरे परिवार को जान से मार देगा। जान के डर से सहमी पीड़िता लंबे समय तक यह जुल्म सहती रही।
इस खौफनाक चुप्पी का पर्दाफाश तब हुआ, जब नाबालिग पीड़िता गर्भवती हो गई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। इस खुलासे के बाद 9 अप्रैल को धर्मशाला महिला थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 व 351(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत केस दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
न्यायालय में इंसाफ की यह लड़ाई बेहद मजबूती से लड़ी गई। सरकार की ओर से उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने अभियोजन पक्ष रखा और आरोपी के खिलाफ ठोस दलीलें पेश कीं। इस दौरान अदालत में 25 अहम गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। गवाहों के अलावा, डीएनए जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी को कानून के शिकंजे में कसने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाई। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में नायब कोर्ट यशपाल का भी अहम सहयोग रहा।
अभियोजन पक्ष की दलीलों, 25 गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक सबूतों का गहन अध्ययन करने के बाद, न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत ने आरोपी के गुनाह को साबित माना। अदालत ने उसे पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत का यह फैसला न केवल उस पीड़िता के लिए न्याय की जीत है, जिसने अपनों के दिए गहरे जख्म सहे, बल्कि यह समाज के लिए एक सख्त संदेश भी है। यह साबित करता है कि जब पुलिस की जांच, वैज्ञानिक सबूत और अभियोजन की पैरवी मजबूत हो तो अपराधियों का बचना नामुमकिन है।








