देश के प्रतिष्ठित कानून संस्थानों में शुमार हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घंडल, शिमला का एक छात्र खुद न्याय के लिए इस कदर बेबस हो गया कि उसने सुसाइड जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। गंभीर हालत में छात्र को उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला में भर्ती करवाया गया है। इस कदम को उठाने से पहले छात्र ने एक बेहद भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन, स्टाफ और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आत्महत्या का प्रयास करने वाले इस छात्र ने वीडियो में भावुक होकर रोते हुए छात्र ने अपनी पूरी आपबीती सुनाई। उसने आरोप लगाया कि कुछ छात्र लंबे समय से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। पीड़ित का दावा है कि उसने इस प्रताड़ना की शिकायत विश्वविद्यालय के अधिकारियों और शिक्षकों से कई बार की, लेकिन उसकी पुकार किसी ने नहीं सुनी। भारी दबाव के बीच पुलिस ने अब मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआत में पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए।
छात्र ने अपने वीडियो में सीधा आरोप साहिल सिंह, रोहित, प्रभात, पार्थ शुक्ला और ज्योतिरादित्य नामक छात्रों पर लगाया है। उसका दावा है कि इन छात्रों ने न सिर्फ उसे परेशान किया, बल्कि खुद को बचाने के लिए उल्टे उसके खिलाफ ही झूठी एफआईआर और एंटी-रैगिंग की फर्जी शिकायत दर्ज करवा दी। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। छात्र के अनुसार, उसने अपने दूसरे वर्ष में भी इन संबंधित छात्रों के खिलाफ रैगिंग की शिकायत की थी, लेकिन तब भी प्रशासन की ओर से कोई अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
इंसाफ की गुहार लगा रहे इस छात्र ने वीडियो में यह चौंकाने वाला दावा किया कि उसके पास अपनी बेगुनाही और आरोपों की पुष्टि करने के लिए सीसीटीवी फुटेज सहित कई पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं। उसने बताया कि वह पिछले करीब एक महीने से अपने इन सबूतों को लेकर पुलिस थाने और विश्वविद्यालय प्रशासन के चक्कर काट रहा था। इस पूरी जद्दोजहद और मानसिक तनाव के कारण उसकी पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही थी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
मानसिक तनाव और परेशानी से पूरी तरह टूट चुके इस छात्र ने वीडियो के अंत में अपने परिवार से रोते हुए माफी मांगी। उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वह अपनी जिंदगी को लेकर कोई कठोर कदम उठाता है, तो इसके लिए केवल और केवल विश्वविद्यालय प्रशासन और उसे प्रताड़ित करने वाले वे छात्र ही जिम्मेदार होंगे। हालांकि, स्वतंत्र रूप से अभी वीडियो में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अंततः अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि रैगिंग से संबंधित इस मामले की जांच अभी चल रही है और फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी शिकायतों की जांच कानून, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और लागू नियमों के तहत निष्पक्ष रूप से की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।








