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हिमाचल: 1984 में ठगे ₹32 हजार…42 साल काटी फरारी, राजस्थान से आई पुलिस ने खिलाड़ी बनकर बाजी मारी

कहते हैं कि अपराध की उम्र चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो जाए, कानून के हाथ एक न एक दिन अपराधी तक पहुंच ही जाते हैं। हिमाचल प्रदेश के नाहन में बिल्कुल ऐसा ही एक मामला सामने आया है। शहर के ऐतिहासिक चौगान मैदान में जिस 69 वर्षीय शख्स को लोग एक सम्मानित एथलेटिक्स कोच के रूप में जानते थे, वह असल में पिछले 42 सालों से पुलिस की रडार पर चल रहा एक शातिर उद्घोषित अपराधी निकला। राजस्थान की उदयपुर पुलिस ने 4 दशकों की लंबी फरारी के बाद, नाहन पुलिस की मदद से एक बेहद सधे हुए अंडरकवर ऑप्रेशन के जरिए इस भगोड़े को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपी विजय कुमार यादव को पकड़ना आसान नहीं था। 42 सालों में उसका हुलिया पूरी तरह बदल चुका था। ऐसे में उदयपुर के धनमंडी थाने से आई पुलिस टीम ने सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय एक मास्टरप्लान बनाया। पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में खिलाड़ी बनकर चौगान मैदान पहुंचे। उन्होंने खेल की बारीकियां सीखने के बहाने कोच विजय कुमार से संपर्क किया। बातचीत के दौरान जब पुलिस को यह शत-प्रतिशत यकीन हो गया कि यह वही भगोड़ा है जिसकी उन्हें तलाश है, तो अगले ही पल खिलाड़ियों ने कोच को हिरासत में ले लिया।

1984 में राजस्थान से फरार होने के बाद विजय कुमार यादव ने अपनी पहचान छिपाने के लिए पूरे देश की खाक छानी। वह असम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में छिपता रहा। अंततः उसने हिमाचल के नाहन शहर को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसने जवाहर नवोदय विद्यालय में भी सेवाएं दीं और बाद में एथलेटिक्स क्लबों से जुड़कर कोच बन गया। नाहन में उसने अपना घर बसाया, वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाया और पत्नी, बच्चों व पोते-पोतियों के साथ एक आम और सम्मानित इंसान की जिंदगी जीने लगा। खुद को बचाने के लिए उसने हरियाणा के भिवानी (रूपगढ़) स्थित अपनी पुश्तैनी संपत्ति और सरकारी दस्तावेजों से अपना नाम तक कटवा लिया था।

यह पूरा मामला 5 मार्च 1984 का है। भंवर सिंह नाम के व्यक्ति ने उदयपुर के धनमंडी थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी कि विजय कुमार यादव और उसके साथियों ने किनारा ग्रुप व अग्रवाल सेल्स के नाम से एक फर्जी संस्था बनाई। इन ठगों ने खुद को केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त बताकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उस दौर में प्रति व्यक्ति 3,000 रुपए वसूले गए। करीब 32 हजार रुपए ठगने के बाद यह गिरोह ऑफिस बंद कर फरार हो गया। पुलिस ने 9 आरोपियों को तो पकड़ लिया था, लेकिन मास्टरमाइंड विजय कुमार यादव चकमा देकर निकल गया था।

राजस्थान पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और तकनीकी जांच का सहारा लिया। भिवानी में उसके पारिवारिक संपर्कों से कुछ अहम सुराग हाथ लगे, जिनकी कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस नाहन तक जा पहुंची। सिरमौर के पुलिस अधीक्षक निश्चित सिंह नेगी ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्थान पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से इस पुराने मामले में फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब नाहन शहर के लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि जिसे वे वर्षों से एक खेल गुरु मान रहे थे, वह असल में 4 दशकों पुराना एक वांटेड ठग था।

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Author: Desk

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