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हिमाचल: पिता को खोया…मां ने दिहाड़ी कर पाला, मंडी के इन 2 सगे भाइयों ने कर दिया काम ‘सैल्यूट’ वाला

सफलता कभी सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, यह साबित कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के दो सगे भाइयों ने। सराज इलाके के सोवली गांव के रहने वाले गिरिराज और दुनी चंद ने अपनी कड़ी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया है, जो आज के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले इन दोनों भाइयों का एक साथ सरकारी शिक्षक (टीजीटी आर्ट्स) के पद पर चयन हुआ है।

 

 

गिरिराज और दुनी चंद की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी है। इनके परिवार के पास कोई बड़ी जमीन या संपत्ति नहीं थी। माता-पिता दोनों दिनभर कड़ी धूप में दिहाड़ी-मजदूरी करके परिवार का पेट पालते थे। बच्चे अभावों के बीच पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन तभी किस्मत ने एक और क्रूर मजाक किया। कुछ साल पहले पिता डोले राम का निधन हो गया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पति के निधन के बाद लीलावती पूरी तरह टूट चुकी थीं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए खुद को संभाला। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटों की पढ़ाई पर आंच नहीं आने दी। पिता के जाने के गम को दोनों भाइयों ने अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि कामयाबी की ज्वाला बनाया। बिना किसी महंगी कोचिंग या सुख-सुविधा के, दोनों ने किताबों को ही अपना संसार बना लिया।

सरकारी नौकरी पाना आज के समय में लोहे के चने चबाने जैसा है। गिरिराज और दुनी चंद जानते थे कि उनके पास संसाधनों की कमी है, इसलिए उन्होंने अपनी मेहनत को हथियार बनाया। दोनों भाइयों ने मौज-मस्ती, रिश्तेदारों के यहां आना-जाना सब छोड़ दिया और दिन-रात पढ़ाई में जुट गए। आज जब दोनों भाइयों ने हजारों उम्मीदवारों को पछाड़ कर टीजीटी आर्ट्स शिक्षक के रूप में अपनी जगह बनाई, तो विधवा मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

आज के दौर में जब हिमाचल प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में युवा नशे की गिरफ्त में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, ऐसे में इन दोनों भाइयों की सफलता एक कड़ा संदेश देती है। इन्होंने साबित कर दिया है कि अगर मन में दृढ़ निश्चय हो, तो इंसान किसी भी विपरीत परिस्थिति से निकलकर खुद को साबित कर सकता है।

जो लोग सफलता को सिर्फ किस्मत या तुक्का मानते हैं, उन सभी के लिए गिरिराज और दुनी चंद की कहानी एक करारा जवाब है। माता-पिता के हाथों के छालों और पसीने ने इन बच्चों को वह मोटिवेशन दिया, जो दुनिया की कोई किताब नहीं दे सकती। कल तक दिहाड़ी मजदूर के रूप में पहचाने जाने वाले पिता के ये बेटे, अब मास्टर जी बनकर प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य रोशन करेंगे।

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Author: Desk

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