
कांगड़ा: कांगड़ा जिले के दूरस्थ गांव बड़ा भंगाल में इस समय हालात काफी चिंताजनक बन हुए हैं। 26 अगस्त काे रावी नदी में आई बाढ़ के चलते गांव का पंचायत भवन, सरकारी प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल, आयुर्वेदिक डिस्पैंसरी, राशन डिपो और 2 पुल रावी नदी की लहरों में बह गए हैं।
पूरा गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुका है। गांव के प्रधान मनसा राम भंगालिया ने कांगड़ा के डिप्टी कमिश्नर को खत लिखकर एसओएस संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि गांव में 300 लोग फंसे हुए हैं, वहीं ऊंची चरागाहों पर 150 से अधिक चरवाहे अपनी सैंकड़ों भेड़ों-बकरियों और मवेशियों के साथ फंसे हैं। उन्हाेंने बैजनाथ के एसडीएम के नेतृत्व में हवाई सर्वे की मांग की है ताकि राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू हो सकें।
प्रधान के अनुसार रावी नदी ने करीब 5 किलोमीटर तक की जमीन को काट डाला है और अपने रास्ते को बदल दिया है। इससे गांव के कई घर ढहने की कगार पर हैं। बाढ़ के कारण गांव का संपर्क जोड़ने वाले दोनों मुख्य ट्रेकिंग रास्ते, थमसर पास (4,654 मीटर) और कलिहानी पास (4,800 मीटर) भी पूरी तरह बंद हो चुके हैं। गांव में रखे राशन और दवाइयों का भंडार भी पूरी तरह बह चुका है, जिससे हालात और भयावह हो सकते हैं। अगर जल्द खाद्य सामग्री, दवाइयां और मेडिकल टीम न पहुंची तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
यह गांव धौलाधार व पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित है, जहां पहुंचना खुद में एक चुनौती है। बड़ा भंगाल एक ऐसा इलाका है जो हर साल अक्तूबर के बाद पूरी तरह से बर्फ में ढक जाता है और छह महीने तक दुनिया से कटा रहता है। इसलिए समय रहते बचाव कार्रवाई अति आवश्यक है।








