शिमला: केंद्रीय जांच एजैंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिमला टीम ने हिमाचल के बहुचर्चित बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ओडिशा में छापेमारी कर करोड़ों की संपत्तियां, लग्जरी गाड़ियां और सुपरबाइक्स जब्त की हैं, लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट तो ये है कि दो लॉकर अभी फ्रीज हैं, जिन्हें खाेलने पर क्या निकलेगा, यह देखने वाला हाेगा।
जानकारी के अनुसार 1396 करोड़ रुपए से ज्यादा के बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी की टीम ने ओडिशा के भुवनेश्वर में दो बड़े ठिकानों पर धावा बोला। यह ठिकाने आरोपी शक्तिरंजन दास के घर और उनकी कंपनियां मैसर्ज अनमाेल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्ज अनमाेल रिसाेर्स प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस थे। ये सब मैसर्ज इंडियन टेक्नाेमेक कंपनी से जुड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच का हिस्सा है। जांच एजैंसी के सूत्रों ने बताया कि छापेमारी के दौरान 13 लाख रुपए कैश, 1.12 करोड़ की ज्वैलरी, संपत्तियों के ढेर सारे दस्तावेज और रिकॉर्ड्स जब्त किए गए, लेकिन जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है, वो है 10 लग्जरी कारों (Porsche से लेकर Mini Cooper तक) और 3 सुपरबाइक्स (Honda Gold Wing Bike और 2 अन्य) की जब्ती। इनकी अनुमानित कीमत 7 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।
बता दें कि इस मामले में सबसे पहले हिमाचल प्रदेश पुलिस की सीआईडी ने एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें इंडियन टेक्नाेमेक कंपनी और उसके निदेशकों पर फर्जी प्रोजैक्ट रिपोर्ट और नकली बिक्री दिखाकर बैंकों से लोन लेने का आरोप लगा। वर्ष 2009 से 2013 के बीच बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से 1396 करोड़ का लोन लिया गया, लेकिन इसे सही काम में न लगाकर पैसा डाइवर्ट कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि इंडियन टेक्नाेमेक कंपनी और उसकी शैल कंपनियों ने 59.80 करोड़ रुपए अनमाेल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में ट्रांसफर किए। अनमाेल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी शक्तिरंजन दास ने इंडियन टेक्नाेमेक कंपनी के प्रमोटर राकेश कुमार शर्मा की मदद से इस अवैध पैसे को माइनिंग बिजनैस में लगाकर वैध दिखाने की कोशिश की। ये सब इतना सुनियोजित था कि बैंकों को चूना लगाकर आरोपी लग्जरी लाइफ जी रहे थे।
ईडी ने इस केस में पहले ही 310 करोड़ की संपत्तियां अटैच की थीं, जिनमें से 289 करोड़ की अप्रैल 2025 में बैंकों को वापस कर दी गईं, लेकिन अब ये नई छापेमारी ने घाेटाले की गहराई को और उजागर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि लॉकर खुलने के बाद और बड़े राज खुल सकते हैं। ईडी की टीम अब इन जब्त संपत्तियों की जांच में जुटी है और ये मामला मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रहा है।








