हिमाचल प्रदेश, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, आज एक दोराहे पर खड़ा है। यहां के पवित्र धार्मिक स्थल, जो कभी शांति और आस्था का केंद्र हुआ करते थे, अब अनियंत्रित पर्यटन के बोझ तले दब रहे हैं। यह दर्द भरी चिंता प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मंदिरों को रोपवे से जोड़ना और इन स्थलों पर बढ़ती भीड़ एक गंभीर विषय है, जिस पर नियंत्रण की सख्त जरूरत है। मणिमहेश यात्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां टनों में फैला कूड़े का अंबार न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि हमारी आस्था का भी अपमान है।
हाल ही में आई विनाशकारी आपदा को एक चेतावनी मानते हुए विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि पहाड़ों में अब अंधाधुंध निर्माण की इजाजत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अब विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं होगा। भविष्य में बनने वाली सभी सड़कें प्रकृति का सम्मान करते हुए बनाई जाएंगी। उन्होंने अतीत की गलतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि पहले कई ऐसी सड़कें बनीं, जिनमें पर्यावरण नियमों को ताक पर रख दिया गया, जिसका नतीजा आज हम सबके सामने है। इसे लेकर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
मंत्री ने चेतावनी दी कि सड़कों की गलत या गैर-जिम्मेदाराना डीपीआर तैयार करने वाले लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को अब बख्शा नहीं जाएगा, उन्हें सीधे चार्जशीट किया जाएगा। अवैध डंपिंग पर भी विभाग कड़ी कार्रवाई कर रहा है। काम में तेजी और गुणवत्ता लाने के लिए अब लंबी सड़कों के निर्माण का ठेका किसी एक कंपनी को देने के बजाय, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाएगा और कई ठेकेदारों को दिया जाएगा, ताकि काम समय पर पूरा हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी निर्माण कार्य के लिए पर्यावरण क्लीयरैंस अनिवार्य होगा।
इस मुश्किल घड़ी में हिमाचल को केंद्र से भी उम्मीदें हैं। विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जोकि हिमाचल को अपना दूसरा घर मानते हैं, 9 सितम्बर को प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। इस अवसर पर राज्य सरकार केंद्र से एक बार फिर यह मांग करेगी कि हिमाचल में आई इस त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
आपदा के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने एक महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री, दिवंगत वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम, जो अक्तूबर में होना था, उसे फिलहाल टाल दिया गया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि प्रदेश अभी आपदा के दर्द से जूझ रहा है। लोगों की आंखों में आंसू हैं। ऐसे समय में कोई भी आयोजन करना उचित नहीं होगा। वीरभद्र सिंह जी ने हमेशा हिमाचल के लोगों के हितों के लिए काम किया और यही उनकी सच्ची विरासत है।








