कभी-कभी शब्द खामोश हो जाते हैं और भावनाएं चेहरे पर सब कुछ बयां कर देती हैं। ऐसा ही एक मंजर कांगड़ा में उस समय देखने को मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश में आई आपदा के पीड़ितों से मिल रहे थे। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला ने जब अपना दर्द सुनाना शुरू किया तो प्रधानमंत्री भी भावुक हो गए। बुजुर्ग महिला की दर्दभरी दास्तां इतनी गहरी थी कि PM मोदी एकटक उन्हें देखते रहे, सुनते रहे और जब उन्होंने बोलना बंद किया तो प्रधानमंत्री ने एक लंबी, गहरी सांस भरी। उस एक सांस में उस मां के दर्द का पूरा अहसास था। वह कुछ बोल नहीं पाए, बस मदद का ऐलान किया और सांत्वना का हाथ बढ़ाया।
ये बुजुर्ग महिला कृष्णा देवी हैं, जो मंडी शहर की रहने वाली हैं और जेल रोड से पार्षद भी रह चुकी हैं। उनके चेहरे पर आई झुर्रियों से ज्यादा गहरा दर्द कुदरत के उस कहर का है, जिसने 29 जुलाई की मनहूस रात को उनकी दुनिया ही उजाड़ दी। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह प्रधानमंत्री से मिलेंगी और अगर मिलेंगी भी तो इस हाल में…उजड़ी हुईं, बिखरी हुईं और दर्द से भरी हुईं।
कृष्णा देवी बताती हैं कि 29 जुलाई की सुबह तड़के करीब 4 बजे भारी बारिश हो रही थी। उनके घर के पास के नाले में अचानक सैलाब (फ्लैश फ्लड) आ गया। उनका परिवार ऑटो चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमाता था और उनके ऑटो नाले के पास ही खड़े थे। परिवार ने सोचा कि कहीं ऑटो सैलाब में बह न जाएं, इसलिए उन्हें सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर देते हैं, लेकिन किसे पता था कि ये सैलाब उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा।
परिवार के 4 लोग ऑटो बचाने के लिए बाहर निकले। सैलाब का बहाव इतना तेज था कि कोई संभल नहीं पाया। कृष्णा देवी का बड़ा और छोटा बेटा, पोता और बड़े बेटे की बहू पानी के तेज बहाव में बह गए। बड़े बेटे को किसी तरह बचा तो लिया गया, लेकिन उसकी दोनों टांगें टूट गईं और वह अब भी अस्पताल में हैं। एक मां के लिए इससे बड़ा दर्द क्या होगा कि उसकी आंखों के सामने उसका हंसता-खेलता परिवार एक पल में उजड़ गया।
जब कृष्णा देवी ने यह पूरी कहानी प्रधानमंत्री मोदी को सुनाई तो वह एक पल के लिए स्तब्ध रह गए। एक मां का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। उनके पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। उन्होंने बस इतना ही कहा कि हम आपके साथ हैं, सरकार हरसंभव मदद करेगी।
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