बुधवार का दिन कुल्लू जिले के शरमाणी गांव के लिए कभी न भूलने वाला दर्द लेकर आया। जब एक ही परिवार के पांच सदस्यों की चिताएं एक साथ जलीं तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें आंसुओं से भीग गईं। एक चिता पर दादी, दूसरी पर मां-बाप और साथ में दो मासूम…यह एक ऐसा हृदयविदारक मंजर था, जिसे देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। चारों ओर सिर्फ मातम, सिसकियां और एक खामोश दर्द पसरा हुआ था।
यह कहानी उस परिवार की है जो 8 सितम्बर की रात को खुशी-खुशी खाना खाकर अपने घर में सोया था। उन्हें क्या पता था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी रात होगी और सुबह का सूरज उनके लिए नहीं उगेगा। रात करीब दो बजे जब पूरा गांव गहरी नींद में था तो प्रकृति का कहर टूटा। पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर दो घरों पर आ गिरा। इस भीषण भूस्खलन ने 52 वर्षीय शिवराम के परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
इस भयानक आपदा में शिवराम तो किसी तरह घायल अवस्था में बच गए, लेकिन उन्होंने एक झटके में अपना सब कुछ खो दिया। उन्होंने अपनी पत्नी, जवान बेटे चुनी लाल, बहू अंजू, 7 साल की पोती जागृति और 5 साल के पोते भूपेश को हमेशा के लिए खो दिया। शिवराम के अलावा उनके छोटे भाई और एक अन्य महिला भी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
घटना के बाद एनडीआरएफ की टीम ने करीब 10 घंटे तक चले सर्च ऑप्रेशन में पांचों शवों को मलबे से बाहर निकाला। उस काली रात के बाद से ही पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। हर चेहरा गमगीन है और हर दिल में इस परिवार के लिए गहरा दुख है।
बुधवार को जब श्मशानघाट पर एक साथ पांच चिताएं सजीं तो हर किसी का दिल दहल गया। सबसे मार्मिक दृश्य वो था जब मासूम बच्चों (जागृति और भूपेश) के शवों को सबसे आगे ले जाया जा रहा था। इस दृश्य को देखकर लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। एक ही आंगन से उठी 5 अर्थियों ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
यह हादसा शिवराम और पूरे गांव को एक ऐसा जख्म दे गया है जो शायद जिंदगी भर नहीं भर पाएगा। एक हंसता-खेलता परिवार अब सिर्फ यादों में सिमट कर रह गया है। हम इस आपदा में काल का ग्रास बने शिवराम के पारिवारिक सदस्याें के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं।








