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हिमाचल: एक ही युवती से शादी कर पूरे देश में सुर्खियां बटोरने वाले सिरमाैर के 2 भाइयाें के साथ हुआ बहुत गलत, भगवान ने छीना बेहद करीब इंसान

कुछ महीने पहले जब हिमाचल के सिरमौर जिले के दो सगे भाइयों ने एक ही युवती से शादी की थी, तो उनकी कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींचा था, लेकिन आज वही परिवार गहरे दुख में डूब गया है। जिन भाइयों के घर खुशियों की शहनाई बजी थी, आज वहां मातम पसरा गया है। सिरमाैर के इन 2 भाइयाें से भगवान ने बेहद करीब इंसान काे छीन लिया है। दोनों भाइयों ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने पिता के निधन की दुखद खबर सांझा की है, जिसके बाद उनके गांव और चाहने वालों में शोक की लहर है।

सिरमौर के शिलाई गांव के रहने वाले प्रदीप नेगी और कपिल नेगी ने अपने पिता की तस्वीर सांझा करते हुए अपने दिल का दर्द बयां किया है। उन्होंने लिखा है कि “पापा, आपके जाने के बाद जिंदगी वैसी नहीं रही जैसी पहले थी, आप हमारे लिए सिर्फ पिता नहीं थे, बल्कि हमारी ताकत, हमारा सहारा और हमारी दुनिया थे। आज भी जब मुश्किलें आती हैं तो आपकी यादों से हिम्मत जुटाते हैं। आपके बिना घर सूना लगता है, और दिल अधूरा।”

दोनों भाइयों ने आगे लिखा कि उनके पिता ने ही उन्हें सच्चाई और ईमानदारी से जीना सिखाया और मुश्किल हालात में भी हिम्मत न हारने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि “आप चले गए, लेकिन आपका आशीर्वाद और आपकी दुआएं हमेशा हमारे साथ हैं। हम जानते हैं कि ऊपर से आप हमें देख रहे हो… पापा, आप हमारी धड़कनों में हो, हमारी सांसों में हो और हमेशा रहोगे। मिस यू पापा।”

यह जानकारी मिलते ही उनकी पोस्ट पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया। हजाराें लोगों ने कमेंट कर परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। बताया जा रहा है कि उनके पिता लंबे समय से कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।

जुलाई में अनोखी शादी से चर्चा में आए थे दाेनाें भाई

गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में प्रदीप नेगी और कपिल नेगी ने सुनीता नाम की युवती से शादी की थी। यह शादी हाटी समुदाय में सदियों से चली आ रही ‘जोड़ीदार प्रथा’ के तहत हुई थी। इस अनोखी शादी ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। इन भाइयों में से एक जलशक्ति विभाग में कार्यरत है। जबकि दूसरा विदेश में शेफ है।

क्या है ‘जोड़ीदार प्रथा’

हाटी समुदाय में यह प्रथा सदियों पुरानी है, जिसे पांडवों के द्रौपदी से हुए विवाह से भी जोड़ा जाता है। सिरमौर के गिरिपार और उत्तराखंड के जौनसार-बावर जैसे इलाकों में यह परंपरा आज भी जीवित है। इस प्रथा के पीछे मुख्य कारण पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा रोकना माना जाता है, ताकि जमीन भाइयों में बंटकर छोटी न हो जाए और परिवार एकजुट रहे।

एक तरफ जहां कुछ महीने पहले यह परिवार अपनी अनूठी परंपरा को लेकर चर्चा में था, वहीं आज पिता के साये के उठ जाने से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस मुश्किल घड़ी में पूरा समुदाय उनके साथ खड़ा है।

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Author: Desk

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