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हिमाचल: खाैफनाक जंगल में खाेया परिवार, 11 घंटे माैत के साये में बीती रात…फिर हुआ खुशखबरी का उजाला

एक परिवार शिकारी माता मंदिर में दर्शन कर घर लौट रहा था, तो उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले 11 घंटे उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल पल होने वाले हैं। घना कोहरा, सर्द रात और खाैफनाक जंगल के बीच वे रास्ता भटक गए, लेकिन प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों के अथक प्रयासों ने इस खौफनाक रात को एक सुखद सुबह में बदल दिया।

डडाैर का रहने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार अपने परिवार के 7 सदस्याें और उनकी एक पूर्व छात्रा आरती बीते कल शिकारी माता के दर्शन करने गए हुए थे। शाम करीब 7:30 बजे मंदिर से वापसी के दौरान घने कोहरे और अंधेरे के कारण वे मुख्य मार्ग से भटककर जंगल में कहीं खो गया। जैसे-जैसे रात गहराती गई, परिवार की चिंता बढ़ती गई। चारों तरफ सिर्फ पेड़ों का साया और जंगली जानवरों का डर था।

जब परिवार से संपर्क टूटा तो जंजैहली के उपप्रधान भीम सिंह ने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी। यह एक फोन कॉल उस बड़े बचाव अभियान की शुरूआत थी, जो पूरी रात चलने वाला था। एसडीएम थुनाग मनु वर्मा को जैसे ही घटना की जानकारी मिली ताे वे तुरंत सक्रिय हो गईं और खुद मौके पर पहुंचकर पूरे ऑप्रेशन की कमान संभाली। उनकी मौजूदगी ने बचाव दलों में एक नया जोश भर दिया।

रात के अंधेरे और मुश्किल पहाड़ी रास्तों की परवाह किए बिना पुलिस, होमगार्ड और स्थानीय लाेगाें की तीन टीमें अलग-अलग दिशाओं में खोज के लिए निकल पड़ीं। एक टीम बूढ़ाकेदार की ओर, दूसरी रायगढ़ की तरफ और तीसरी देज्जी से पखथियार के घने जंगलों में परिवार को ढूंढने लगी। जब शुरूआती घंटों में कोई सुराग नहीं मिला तो रात 11 बजे मंडी से एसडीआरएफ की विशेष टीम को बुलाया गया।

एसडीआरएफ की टीम रात 2 बजे रुहाड़ा क्षेत्र पहुंची और आधुनिक उपकरणों के साथ खोज अभियान को तेज कर दिया। बचाव दल पूरी रात जंगल का चप्पा-चप्पा छानते रहे। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब आज सुबह करीब 6:30 बजे टंग्राल नाला के पास पूरा परिवार सुरक्षित मिल गया। ठंड और डर से सहमे होने के बावजूद सभी सदस्य पूरी तरह स्वस्थ थे। उन्हें देखते ही बचाव दल के चेहरों पर भी मुस्कान खिल उठी।

एसडीएम मनु वर्मा ने कहा कि यह एक कठिन ऑप्रेशन था, लेकिन सभी विभागों के समन्वय और स्थानीय लोगों के सहयोग से हम परिवार को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहे। हमारी प्राथमिकता हरेक जान को बचाना थी। रात भर जागकर अपनी जान जोखिम में डालने वाले उन सभी गुमनाम नायकों को सलाम, जिनकी वजह से आज एक परिवार सुरक्षित अपने घर लौट आया है।

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Author: Desk

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