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हिमाचल: आपदा राहत का स्पेशल पैकेज पूरे प्रदेश में लागू, 400 स्टाफ नर्सों के पद भरने की मंजूरी, देखें कैबिनेट के बड़े फैसले

हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आम जनता को राहत देने और प्रदेश के विकास को गति देने वाले कई बड़े फैसले लिए गए। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु आपदा प्रभावितों को मरहम लगाना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और शासन-प्रशासन को और बेहतर बनाना रहा। चलिए जानते हैं इन फैसलों का आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा।

कैबिनेट ने सबसे बड़ा और मानवीय फैसला आपदा प्रभावितों के हक में लिया। अब तक केवल मंडी जिले को मिल रहा राहत का स्पेशल पैकेज पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। जिन लोगों के घर आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें अब सरकार की ओर से चार लाख रुपए की पहली किश्त जारी की जाएगी, ताकि वे फिर से अपना आशियाना बनाने की शुरुआत कर सकें। जिनके घरों को आंशिक नुक्सान हुआ है, उन्हें भी राहत देते हुए डेढ़ लाख रुपए की राशि एकमुश्त दी जाएगी। कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपए की राहत राशि अभी तक केंद्र से नहीं मिली है। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि वह इसका इंतजार नहीं करेगी और अपने खजाने से प्रभावितों की मदद करेगी।

प्रदेश के अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए कैबिनेट ने 400 स्टाफ नर्सों के पदों को भरने की मंजूरी दे दी है। इन नर्सों को 25,000 रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा और इनकी भर्ती जल्द शुरू होने वाले राज्य चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी। यह फैसला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में एक बड़ा कदम है।

सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लिया है। इसके लिए विभाग के पास 100 से ज्यादा प्रस्ताव आए हैं, लेकिन आपदा के कारण कई इलाकों में सड़कें अभी भी अस्थायी तौर पर ही चालू हो पाई हैं, जिसे देखते हुए कैबिनेट ने फिलहाल पंचायत चुनाव को टालने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि जब तक जमीनी हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक चुनाव कराना सही नहीं होगा।

शहरी निकायों में स्थिरता लाने के लिए मेयर के कार्यकाल को अढ़ाई साल से बढ़ाकर फिर से पांच साल कर दिया गया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि ढाई साल के छोटे कार्यकाल की वजह से खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की आशंका बनी रहती थी, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते थे। अब मेयर पूरे पांच साल शहर के विकास पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

हिमाचल में पर्यटन परियोजनाओं में आने वाली लालफीताशाही को खत्म करने के लिए “टूरिज्म इन्वेस्टमेंट प्रमोशन काउंसिल” बनाई जाएगी। इस काउंसिल के अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होंगे, जिससे फैसलों में तेजी आएगी। 50 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को अब इसी काउंसिल से मंजूरी लेनी होगी और सभी तरह के अनापत्ति प्रमाण पत्र 14 दिनों के भीतर देने होंगे। इससे निवेशकों को राहत मिलेगी और पर्यटन परियोजनाओं को गति मिलेगी।

राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत सरकार ने 1000 मौजूदा डीजल/पैट्रोल टैक्सियों को इलैक्ट्रिक टैक्सियों में बदलने की मंजूरी दी है। इसके लिए टैक्सी मालिकों को 40 प्रतिशत सबसिडी दी जाएगी, जिससे उन पर आर्थिक बोझ कम होगा और प्रदेश में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।

कैबिनेट ने हजारों कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी कर उन्हें बड़ी राहत दी है। 1 अप्रैल 2025 से एसएससी शिक्षकों, कम्प्यूटर शिक्षकों, मिड-डे मील वर्करों और अंशकालिक जलवाहकों के मानदेय में 500 रुपए प्रति माह की बढ़ोतरी होगी। इससे करीब 50 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे। विशेष पुलिस अधिकारियों के मानदेय में भी 1 अप्रैल 2025 से 300 रुपए प्रति माह की वृद्धि की गई है, जिससे 510 अधिकारियों को फायदा मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शे पास कराने की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी गांव में मकान बनाने के नियमों को आसान बनाने पर अपनी सिफारिशें देगी, ताकि ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

सरकार ने मेधावी खिलाड़ियों को तोहफा देते हुए 19 और खेलों को उस सूची में शामिल किया है, जिनके आधार पर सरकारी नौकरी में आरक्षण मिलता है। इनमें बेसबॉल, पैरा स्पोर्ट्स, रग्बी, तलवारबाजी, किक बॉक्सिंग और वुशु जैसे खेल शामिल हैं। इससे इन खेलों के खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा। कैबिनेट ने कनिष्ठ कार्यालय सहायक जेओए (आईटी) के लिए एक अलग राज्य स्तरीय कैडर बनाने को मंजूरी दी है। पहले चरण में 300 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

बैठक में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ और ‘हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण परियोजना (जाइका चरण-2)’ के कार्यान्वयन व निगरानी के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली को मंजूरी दी गई। यह प्रणाली विभागों, एसपीएनएफ और जाइका के बीच समन्वय बढ़ाएगी तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी।

बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को विनियमित करने हेतु ग्राम पंचायतों के लिए ‘ग्रामीण क्षेत्र विकास दिशा-निर्देशों’ के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप-समिति गठित की गई। इसमें ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी सदस्य होंगे।

बैठक में सोलन जिले में हरिपुर संधोली-2, सूरजमाजरा लुबाना और बद्दी ब्लॉक के चक्कन में 3 नए सरकारी प्राथमिक विद्यालय खोलने की भी मंजूरी दी गई।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग को कई राहतें मिलीं। कैबिनेट ने नाहन मेडिकल कॉलेज के विस्तार के लिए नई भूमि पर निर्माण कार्य को हरी झंडी दी। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में नए स्नातकोत्तर व सुपर स्पैशियलिटी पाठ्यक्रमों के लिए कार्योत्तर अनुमति प्रदान की गई। आईजीएमसी शिमला, डाॅ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल काॅलेज एवं अस्पताल टांडा, नेरचौक मेडिकल कॉलेज और डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में एमरजैंसी मेडिसिन विभाग के 32 सहायक प्रोफैसर पदों को चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के तहत स्थानांतरित करने के स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। साथ ही, ‘नई रैजीडैंट डॉक्टर्स नीति-2025’ तैयार करने और सहायक स्टाफ नर्स नियुक्ति नीति बनाने को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु मूल निवासियों के लिए भू-स्थलीय सौर ऊर्जा परियोजनाओं की योजना में संशोधन किया गया। अब इसका नाम ‘राजीव गांधी स्वरोजगार सौर ऊर्जा योजना’ होगा, जिसमें जनजातीय क्षेत्रों में 5 प्रतिशत और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा। 100 किलोवाट से 2 मैगावाट तक की परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

पर्यटन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए ‘पर्यटन निवेश संवर्धन परिषद’ की स्थापना को मंजूरी दी गई, जो पारदर्शी तरीके से निवेश का मूल्यांकन व सुगमता सुनिश्चित करेगी। फार्मा इकाइयों के लिए एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल आदि की आपूर्ति हेतु हिमाचल प्रदेश सामान्य उद्योग निगम (HPSIDC) को नोडल एजैंसी नामित किया गया।

बैठक में पुरुष अनुबंध कर्मचारियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश देने का निर्णय लिया गया। छात्रों के लिए ‘डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना’ में संशोधन कर स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए 1 प्रतिशत  ब्याज दर पर ऋण और परिवार आय सीमा को 4 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपए प्रति वर्ष करने को मंजूरी दी गई। इसके अलावा बैठक में पूंजी निवेश 2025-26 के लिए विशेष सहायता योजना के संदर्भ में ‘हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन नियम, 2014’ में संशोधन को भी हरी झंडी दी गई।

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