सात साल के लंबे सुकून के बाद बिलासपुर शहर एक बार फिर डेंगू के खौफ से कांप उठा है। डेंगू की दस्तक से शहरवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक 16 मामलों की पुष्टि किए जाने के बाद गलियों और मोहल्लों में एक अनजाना डर फैल गया है। इससे पहले वर्ष 2018 में शहर ने डेंगू का ऐसा प्रकोप झेला था।
वार्ड नंबर-एक, दो और तीन डेंगू के मामले
जानकारी के मुताबिक शहर के वार्ड नंबर-एक, दो और तीन में डेंगू के मामले सामने आए हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति वार्ड नंबर-दो की है, जहां एक साथ 6 लोग डेंगू से संक्रमित पाए गए हैं। एक साथ इतने मामले सामने आने से इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है और वे अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर खासे चिंतित हाे उठे हैं।
वार्ड नंबर-दो में व्यक्ति की मौत, विभाग बाेला-डेंगू नहीं कारण
इसी बीच वार्ड नंबर-दो में एक व्यक्ति की मौत की खबर ने लोगों की चिंता को और गहरा कर दिया। यह खबर आग की तरह फैली, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत स्थिति को स्पष्ट किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशि दत्त शर्मा ने पुष्टि की कि व्यक्ति की मौत डेंगू से नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मृतक में डेंगू के कोई लक्षण नहीं पाए गए थे। यह दुखद है, लेकिन हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि मौत का कारण डेंगू नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मृतक का भाई डेंगू से पीड़ित है, जिसका इलाज चल रहा है। इस खबर ने भले ही मौत की अफवाह पर विराम लगाया हो, लेकिन यह दर्शा दिया है कि डेंगू का खतरा हर घर के दरवाजे पर खड़ा है।

एक्शन मोड में प्रशासन, घर-घर दी जा रही दस्तक
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बुधवार को रौड़ा सैक्टर स्थित सिविल डिस्पैंसरी का औचक निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देश दिए कि घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करें और जहां भी लापरवाही दिखे, वहां चालान काटने जैसी सख्त कार्रवाई करें। नगर परिषद को भी प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत फॉगिंग करवाने और साफ-सफाई का विशेष अभियान चलाने के आदेश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पिछले 15 दिनों से बुखार के हर मरीज का रिकॉर्ड रख रही हैं और लोगों को घर पर ही इलाज मुहैया करा रही हैं।
कैसे पहचानें डेंगू के लक्षण?
सीएमओ डॉ. शशि दत्त शर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। उनके अनुसार डेंगू से संक्रमित हाेने पर व्यक्ति काे 105 डिग्री तक तेज बुखार आना, सिर और खासकर आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द हाेना, मांसपेशियों और जोड़ों में असहनीय दर्द, जी मिचलाना और उल्टी होना और शरीर पर लाल रंग के चकत्ते बनना इत्यादि हाे सकते हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा हथियार: ये सावधानियां बरतें
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस जंग को बिना जन-सहयोग के नहीं जीता जा सकता। डेंगू से बचाव के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। ऐसे में अपने घर के कूलर, पुराने टायर, गमलों और टंकियों में पानी जमा न होने दें। उन्हें नियमित रूप से साफ करें। सुबह और शाम के समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें ताकि मच्छर न काट सकें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित उपाय है। बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल का सेवन करें। एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं प्लेटलेट्स कम कर सकती हैं, इसलिए इनसे बचें। लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर जांच करवाएं।








