बिलासपुर: हिम्स ITI संस्थान घुमारवीं में ‘नशे का उभरता कारण जागरूकता की कमी’ विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं में दिन-प्रतिदिन बढ़ते नशे के रुझान के कारणों का पता लगाना और उन्हें इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना था। कार्यक्रम में आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विषय पर गहन परिचर्चा की।
कार्यशाला की मुख्य वक्ता प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि नशा अब एक व्यक्तिगत समस्या न रहकर एक गंभीर सामाजिक विकार का रूप ले चुका है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशे में ग्रस्त युवा पीढ़ी न केवल अपना भविष्य अंधकारमय कर रही है, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी खतरा बनती जा रही है। यह देखकर दुख होता है कि अब अभिभावक भी अपने बच्चों को नियंत्रित करने में असक्षम महसूस कर रहे हैं।
डॉ. राजकुमारी ने युवाओं में नशे की बढ़ती लत के पीछे कई कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी में सहनशीलता, धैर्य, आत्म-नियंत्रण और अनुशासन की कमी देखी जा रही है। साथ ही, आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अभिभावकों का अपनी संतानों पर नियंत्रण कम हो गया है और माता-पिता में भी इस विषय पर जागरूकता का अभाव है। एक मंच अभिवावकों को भी अपने विचार सांझा करने के लिए मिलना चाहिए, जहां वे भी अपनी जानकारियों को सांझा कर सकें। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान के लिए एक सामूहिक पहल की आवश्यकता है, जिसमें अभिभावक, बुद्धिजीवी वर्ग, शिक्षक, युवा पीढ़ी और मनोवैज्ञानिकों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि आप स्वयं नशे से दूर रहें और आत्म-नियंत्रण से अपना बचाव करें। यदि आपका कोई दोस्त या मित्र नशे की गिरफ्त में है तो उसे परामर्श के लिए मनोवैज्ञानिक के पास ले जाएं। सही परामर्श से किसी को भी इस दलदल से बाहर निकाला जा सकता है।
इस अवसर पर हिम्स आईटीआई के प्रबंधक विक्रम सिंह ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम युवाओं को सही दिशा देने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। कार्यशाला के दौरान संस्थान के प्रबंधक विक्रम सिंह, समस्त शिक्षक वर्ग, स्टाफ सदस्य और बड़ी संख्या में प्रशिक्षु उपस्थित रहे।









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