रविवार का दिन हिमाचल के लिए एक अनोखा संगम लेकर आया, जहां एक ओर अध्यात्म की अमृत वर्षा हुई तो दूसरी ओर सामाजिक सुधार की एक नई मिसाल पेश की गई। यह अवसर था उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री एवं सचिन शर्मा के “आशीर्वादोत्सव” का, जिसमें राधास्वामी सत्संग डेरा ब्यास के प्रमुख बाबा गुरविंदर सिंह ढिल्लों स्वयं हाेने वाले नवयुगल को आशीर्वाद देने पहुंचे।

इससे पहले अमराली के सत्संग केंद्र में बाबा गुरविंदर सिंह जी के प्रवचनों ने हजारों श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति से सराबोर कर दिया। उनकी एक झलक पाने की चाहत में संगत का सागर ऐसा उमड़ा कि शनिवार रात से ही लोग पहुंचने लगे थे। सुबह तक आलम यह था कि डेरा के सेवादारों ने अपनी निस्वार्थ सेवा से कई किलोमीटर तक की सड़कों को पार्किंग स्थल में बदल दिया, ताकि किसी को असुविधा न हो।
जब गुरु ने दिया आशीर्वाद
सत्संग समाप्त होने के बाद बाबा गुरविंदर सिंह जी सीधे गोंदपुर जयचंद पहुंचे, जहां उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का परिवार अपनी बेटी के लिए आशीर्वाद मांग रहा था। जैसे ही डेरा प्रमुख समारोह में पहुंचे ताे माहौल में एक दिव्य शांति छा गई। डॉ. आस्था और सचिन ने बड़ी विनम्रता से उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। वह पल हर किसी के दिल को छू गया, जब एक पिता की खुशी में शामिल होने के लिए एक आध्यात्मिक गुरु स्वयं चलकर आए।

एक पिता का समाज को संदेश, “मेरी बेटी ही मेरा बेटा है”
इस आयोजन की सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायक बात उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का वह फैसला था, जिसने इसे सिर्फ समारोह से कहीं ऊपर उठा दिया। उन्होंने आयोजन में किसी भी तरह का शगुन या लिफाफा लेने से साफ इन्कार कर दिया। उनके इस कदम के पीछे एक गहरा संदेश छिपा था कि हमारी बेटी भी हमारा बेटा ही है। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि समाज की उस सोच पर प्रहार था जो बेटियों को पराया धन समझती है। इस एक फैसले से उन्होंने यह साबित कर दिया कि बेटी का विवाह खुशी का अवसर है, लेन-देन का नहीं। इस दौरान हिमाचल और पंजाब के बड़े-बड़े राजनेता भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।








