वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

कांगड़ा: कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे देश के प्रहरी, अचानक थम गईं सांसें; नर्स की हर कोशिश भी नहीं बचा सकी जान

जिंदगी की डोर कब और कहां टूट जाए, यह कोई नहीं जानता। जिस सैनिक ने जीवन भर देश की सीमाओं पर मौत को मात दी, अंततः देहरा की सीएसडी कैंटीन में घर का सामान लेने की एक सामान्य कतार उनके जीवन की आखिरी कतार बन गई।

मंगलवार काे देहरा के अंतर्गत आते बढ़ल गांव निवासी 75 वर्षीय सेवानिवृत्त कैप्टन करतार चंद मिन्हास सीएसडी कैंटीन देहरा पहुंचे थे। एक अनुशासित फौजी की तरह वे लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। शायद उनके मन में घर के सामान की सूची रही होगी, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। वे संभलने की कोशिश में पास ही एक बेंच पर बैठ गए, लेकिन कुछ ही पलों में वे बेसुध हो गए।

भीड़भाड़ वाली कैंटीन में जब कैप्टन मिन्हास अचेत हुए तो वहां अफरा-तफरी के बीच इंसानियत की एक उम्मीद जागी। संयोग से लाइन में छुट्टी पर चल रही एक सरकारी नर्स भी मौजूद थीं। अपने परिजनों के साथ खरीदारी करने आईं उस नर्स ने जब बुजुर्ग को गिरते देखा तो अपना सामान छोड़कर वे तुरंत मदद को दौड़ीं। उन्होंने बिना समय गंवाए कैप्टन मिन्हास को सीपीआर देना शुरू किया। वह लगातार उनकी सांसें लौटाने की जद्दोजहद करती रहीं, लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आनन-फानन में उन्हें सिविल अस्पताल देहरा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि कर दी कि कैप्टन साहब अब इस दुनिया में नहीं रहे। माना जा रहा है कि एक हृदयाघात ने हंसते-खेलते बुजुर्ग की जान ले ली।

एक तरफ एक फौजी का अनुशासन तो दूसरी तरफ एक नर्स का अनजान व्यक्ति के लिए किया गया भगीरथ प्रयास दोनों ही देहरा वासियों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ गए। कैप्टन करतार चंद मिन्हास का अचानक जाना उनके परिवार और क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। द प्वाइंट हिमाचल दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार काे दुख सहन की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना करता है।

Desk
Author: Desk

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें
error: Content is protected !!