तस्वीराें में जिन शब्दाें काे आप देख रहे हैं, वाे आखिरी शब्द मंडी तेजाब कांड की शिकार ममता के हैं। या यूं कह लीजिए कि ममता की आखिरी इच्छा जो उसने तेजाब से जले हुए अपने कांपते हाथों से लिखकर दुनिया को बताने की कोशिश की। सोचिए कितने दर्द में होगी… वो बोल नहीं सकती थी, लेकिन जब उसे लगा कि सांसों की डोर टूटने वाली है, वो दुनिया छोड़ने वाली है तो जाते जाते हाथ चलाने की हिम्मत की, ताकी बता सके कि वो क्या चाहती है, उसके मन में क्या है।
एक तस्वीर में देखेंगे तो ममता का लिखा साफ पढ़ा जा रहा है। तेजाब, उसके पति का नाम नंदलाल और कड़ी सजा दिलवाना, साथ ही नीचे लिखा है बाकी…इसके बाद दूसरी तस्वीर में लिखा कुछ ज्यादा समझ तो नहीं आ रहा है, लेकिन नीचे लिखा है मंडी हनुमान घाट पर… और परिजनों के मुताबिक ममता चाहती थी कि उसका संस्कार उसके ससुराल में ना किया जाए बल्कि मंडी के हनुमान घाट पर किया जाए।

कथित तौर पर ये सब ममता ने अपने हाथों से लिखा है… ये शब्द चंद हैं… कुछ पढ़े जा रहे हैं… तो कुछ का भाव सिर्फ महसूस किया जा सकता है, लेकिन इनके पीछे का दर्द बेहद है। जैसे हर शब्द कह रहा हो… मैं जीना चाहती थी… जी नहीं पाई तो अब मैं सिर्फ इंसाफ चाहती हूं। ममता ने इन शब्दों में अपने पति और संस्कार को लेकर आखिरी इच्छा जताई है।
बीती रात ममता जिंदगी की लड़ाई हार गई, लेकिन अपने पीछे छोड़ गई एक टीस, एक सवाल और एक ऐसी आखिरी चिट्ठी जो हर किसी के दिल को चीर जाती है, लेकिन हिमाचल शर्मिंदा है कि महिला अपने ही घर में भी सुरक्षित क्यों नहीं है। बाहर के शैतानों से तो बचे, लेकिन अपनों से कौन बचाए?
पिछले शनिवार को ममता पर उसके पति ने एसिड फैंका और फिर छत से धक्का दे दिया। तीन चार दिन वो PGI चंडीगड़ में ICU रही। एक उम्मीद जगी कि अब ममता ठीक होकर ही बाहर आएगी। इस हिम्मत वाली ने भी खुद को जिंदा रखने की काफी हिम्मत रखी… जिंदगी और मौत के बीच लड़ती रही… तेजाब से जले हुए शरीर की जलन का ताव सहते हुए उसने फिर से उठ खड़े होने की हिम्मत की थी, लेकिन बीती रात को जिंदगी की जंग हार गई और अपने पति से मिले इस दर्द के बीच उसने दम तोड़ दिया।
इस पूरे मामले में पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है और अब ममता की माैत के बाद उसके पति पर हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा, लेकिन सोचिए जिससे सांस नहीं ली जा रही थी, जो हिल नहीं पा रही थी, उसके दिल में भला कितना दर्द होगा कि उसे अपने कातिल को सजा दिलवाने और अपने संस्कार को दूसरी जगह करने की आखिरी इच्छा जतानी पड़ी।








