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एक गलतफहमी और जिंदा शख्स बन गया मुर्दा…धरती के भगवान काे काेसने लगे लाेग, जब सच सामने आया ताे उड़ गए सबके हाेश

सोचिए उस घर का मंजर क्या रहा होगा… जहां आंगन में चीख-पुकार मची हो, रिश्तेदार सांत्वना दे रहे हों और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो चुकी हों… लेकिन तभी, जिस शख्स के लिए कफन का इंतजाम हो रहा हो, वो अचानक अपनी पलकें झपका दे और पानी मांगने लगे!

कांगड़ा के पालमपुर से आई एक खबर ने सबको चौंका दिया था कि एक शख्स मरने के बाद जिंदा हो गया, लेकिन हकीकत यह है कि वो शख्स मरा ही नहीं था। भावनाओं के सैलाब और घबराहट में एक छोटी सी ‘बात’ का ‘बतंगड़’ बन गया। न यह टांडा मेडिकल कॉलेज की लापरवाही थी और न ही कोई कुदरती चमत्कार… यह बात है एक गलतफहमी की, जिसने एक जिंदा इंसान को कुछ घंटों के लिए मुर्दा बना दिया।

मामला पालमपुर के बिंद्रावन का है। 52 साल के मिलाप चंद लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे। शुक्रवार को तबीयत बिगड़ी तो परिवार उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज ले गया। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन हालत नाजुक थी। डॉक्टरों ने मानवीय आधार पर सलाह दी कि इनके बचने की उम्मीद कम है, आप इन्हें घर ले जाइए और वहीं इनकी सेवा कीजिए।

अस्पताल से घर लौट रहे परिजनों ने घर पर फोन मिलाया। घबराहट और जल्दबाजी में बस इतना कहा कि हम आ रहे हैं, कमरा खाली कर दो। कहने वाले का मतलब था कि मरीज को लिटाने और सेवा करने के लिए साफ जगह चाहिए, लेकिन घर पर बैठे डरे हुए परिवार ने इसका मतलब कुछ और ही निकाल लिया। उन्होंने समझा कि मिलाप चंद की माैत हाे गई है और शव को रखने के लिए कमरा खाली करवाया जा रहा है।

देखते ही देखते घर में रोना-धोना शुरू हो गया। रिश्तेदारों को मौत की खबर दे दी गई। जब मिलाप चंद को घर लाया गया, तो वो बेसुध थे, शरीर में हरकत नहीं थी। परिजनों को लगा कि प्राण पखेरू उड़ चुके हैं। उनकी आंखें खुली थीं, जिसे लोग मौत की निशानी समझ रहे थे। जैसे ही रस्मों के लिए उन्हें नीचे लिटाया गया और किसी ने उनकी आंखें बंद करने की कोशिश की… तभी मिलाप चंद ने पलकें झपकाईं। शरीर हिला, उन्होंने पानी पिया और सांसें सामान्य चलने लगीं। एक पल के लिए वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया। जिसे वो चमत्कार मान रहे थे, वो दरअसल जीवन की डोर थी जो कभी टूटी ही नहीं थी।

जब बात मीडिया तक पहुंची तो पहले डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगे, लेकिन सच सामने आया कि डॉक्टरों ने न तो मृत घोषित किया था और न ही कोई डैथ सर्टिफिकेट दिया था। यह घटना न लापरवाही थी, न चमत्कार… यह बस अपनों के बीच, अपनों के लिए हुई फिक्र की एक भावुक भूल थी। बता दें कि इस सारे घटनाक्रम में करीब 5 घंटे बाद मिलाप चंद दुनिया से चल बसे थे।

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Author: Desk

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