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जिस बेटे काे मृत समझ बैठा था परिवार, वाे 15 साल बाद लाैटा जिंदा, साेशल मीडिया ने दिखाई घर की राह

कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया कायम है और हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत बनाल के घरथोली गांव में यह कहावत सच साबित हुई है। यहां एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। जिस बेटे बलदेव को परिवार 15 साल पहले खो चुका था और उसे मृत मान बैठा था, वह शनिवार को अचानक सही सलामत अपने घर लौट आया। बलदेव की वापसी पर गांव में दिवाली जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया और घर के आंगन में आरती उतारकर गृह प्रवेश करवाया।

नौकरी ज्वॉइन करने निकले और हो गए लापता

बलदेव के बड़े भाई प्रताप सिंह ने बताया कि यह कहानी 15 साल पहले शुरू हुई थी। बलदेव ग्रिफ इंडिया आर्मी में भर्ती हुए थे और त्रिपुरा में अपनी ड्यूटी ज्वॉइन करने जा रहे थे। उन्होंने आखिरी बार दिल्ली से अपने परिवार से फोन पर बात की थी, लेकिन उसके बाद वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। न तो वह ड्यूटी पर पहुंचे और न ही घर लौटे। परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई और सालों तक तलाश की, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं।

याददाश्त खोई, गौशाला में गुजारे 9 साल

परिजनों के मुताबिक, गायब होने के दौरान बलदेव की याददाश्त चली गई थी। वह भटकते हुए हरियाणा के हिसार स्थित एक गौशाला पहुंच गए, जहां उन्होंने करीब 9 साल गुजारे। कोरोना महामारी के दौरान उन्हें वहां से निकाल दिया गया। इसके बाद वह राजस्थान के बीकानेर जिले के मलोटी गांव पहुंच गए। वहां एक बिश्नोई परिवार ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए इस भटकते हुए व्यक्ति को आश्रय दिया और महीनों तक उनकी सेवा की।

फेसबुक वीडियो ने दिखाया घर का रास्ता

बलदेव अक्सर अपनी बातों में कभी हमीरपुर का चबूतरा तो कभी ऊना का जिक्र करते थे। बिश्नोई परिवार को लगा कि यह व्यक्ति कहीं दूर से है और अपना घर भूल चुका है। उन्होंने बलदेव का एक वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड कर दिया। यह वीडियो वायरल होते हुए हमीरपुर की एक महिला तक पहुंचा, जिसने इसे अपने परिचितों को भेजा। संयोग से यह वीडियो बलदेव की भाभी ने देख लिया और तुरंत अपने देवर को पहचान लिया। इसके बाद परिवार फौरन राजस्थान रवाना हुआ और शनिवार को उन्हें घर ले आया।

बलदेव के स्वागत के लिए उमड़ा जनसैलाब

15 साल बाद घर के चिराग को वापस पाकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बलदेव के स्वागत के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। पुराने स्कूल के साथी, रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें गले लगाने के लिए कतार में खड़े रहे। स्थानीय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह, पंचायत प्रधान कांता देवी और राजपूत महासभा के जिला महासचिव जोगेंद्र ठाकुर ने भी घर पहुंचकर परिवार को बधाई दी।

पत्नी ने वर्षों बाद कर लिया दूसरा विवाह

फिलहाल, बलदेव की याददाश्त पूरी तरह वापस नहीं आई है। वह केवल परिवार के कुछ सदस्यों और पुरानी जगहों को पहचान पा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि घर के माहौल में धीरे-धीरे उनकी याददाश्त लौटने की पूरी संभावना है। हालांकि एक दुखद पहलू यह भी सामने आया कि बलदेव की पत्नी ने वर्षों बाद दूसरा विवाह कर लिया है और उसे अपनी बेटी भी नहीं दिखी।

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Author: Desk

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