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मंडी: डीसी ने तोड़ा प्रोटोकॉल, ‘वीर नारियों’ को दी मुख्य अतिथि की कुर्सी; कहा-“असली VIP ये हैं, मैं तो सेवक हूं”

मंडी शहर के इंदिरा मार्कीट स्थित शहीद स्मारक पर 54वें विजय दिवस पर मानवीयता की अनूठी मिसाल देखने काे मिली। 1971 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत के जश्न और देशभक्ति के नारों के बीच एक ऐसा पल आया जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखों को नम और सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया।

अक्सर सरकारी समारोहों में प्रोटोकॉल और पद सबसे ऊपर होते हैं, लेकिन मंडी के डीसी अपूर्व देवगन ने यह साबित कर दिया कि वीरों के सम्मान से बड़ा कोई पद नहीं होता। समारोह में जब मुख्य अतिथि के रूप में डीसी पहुंचे तो उन्होंने पारंपरिक प्रोटोकॉल को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद उन बूढ़ी आंखों और झुर्रियों वाले चेहरों को तलाशा, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अपने सुहाग को देश पर कुर्बान कर दिया था।

डीसी अपूर्व देवगन ने वीर नारियों (शहीदों की पत्नियों) को हाथ जोड़कर नमन किया और उन्हें सम्मानपूर्वक पहली पंक्ति में (मुख्य अतिथि के स्थान पर) बैठाया। खुद चुपचाप दूसरी पंक्ति में जाकर बैठ गए। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब दिल को छू लेने वाला था। उन्होंने कहा कि विजय दिवस जैसे आयोजनों में वीर नारियों को ही मुख्य अतिथि का सम्मान मिलना चाहिए। असली सर्वोच्च बलिदान इन परिवारों ने दिया है, मैं तो केवल एक सहयोगी की भूमिका में हूं। भविष्य में भी सर्वोच्च स्थान इन्हीं का होना चाहिए।

इस भावुक माहौल में जब 1971 युद्ध के शहीदों की पत्नियों को सम्मानित किया गया तो पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सम्मानित होने वाली देवियों में शहीद सिपाही जय सिंह की पत्नी विशन देवी, शहीद सिपाही किशन चंद की पत्नी चिंता देवी, शहीद नायक अमर सिंह की पत्नी निर्मला देवी, शहीद सिपाही नरोत्तम राम की पत्नी कृष्णा देवी, शहीद लांस नायक महंत राम की पत्नी तुलसी देवी, शहीद सिपाही कृष्ण चंद की पत्नी विमलकांत और शहीद सिपाही खूब राम की पत्नी विमला कुमारी शामिल थीं। इन सभी के चेहरों पर अपने पतियों की शहादत का गर्व साफ झलक रहा था।

जिला सैनिक कल्याण विभाग के उपनिदेशक लैफ्टिनैंट कर्नल गोपाल गुलेरिया ने अतीत के पन्नों को पलटते हुए बताया कि कैसे मात्र 14 दिनों में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश का निर्माण किया था, लेकिन इस जीत की कीमत भी भारी थी। देश के 3845 जवानों ने शहादत दी थी, जिनमें हिमाचल के 190 और मंडी जिले के 21 वीर सपूत शामिल थे।

इस अवसर पर जिला प्रशासन, सैनिक कल्याण विभाग और पूर्व सैनिकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर मौन रखा। समारोह में नगर निगम महापौर वीरेन्द्र भट्ट, ब्रिगेडियर मदनशील शर्मा, कर्नल केके मल्होत्रा और डिफैंस वुमेन वैल्फेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष आशा ठाकुर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, लेकिन विजय दिवस उन वीर नारियों और डीसी के उस मानवीय कदम के नाम रहा, जिसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाकर संवेदनाओं का एक नया पुल बना दिया।

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Author: Desk

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